साल 2016…कोपा अमेरिका का फाइनल। अर्जेंटीना के सामने चिली थी। मेसी की टीम एक बार फिर खिताब से चूक गई। यह सिर्फ एक मैच की हार नहीं थी। इससे पहले भी मेसी अर्जेंटीना को बड़े फाइनल तक ले जा चुके थे, लेकिन हर बार ट्रॉफी उनसे दूर रह गई थी। न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में उस रात मेसी बेहद निराश नजर आए। पेनल्टी शूटआउट में उनका प्रयास लक्ष्य से चूक गया और चिली ने खिताब अपने नाम कर लिया। मेसी के लिए यह लगातार तीसरा बड़ा फाइनल था, जिसमें अर्जेंटीना को हार मिली थी। मैच के बाद मेसी ने वह फैसला सुनाया, जिसने पूरी फुटबॉल दुनिया को हिला दिया।
उन्होंने कहा था, ‘राष्ट्रीय टीम मेरे लिए खत्म हो गई है। यह चार फाइनल हो चुके हैं और मैं जीत नहीं सका। मैंने अपनी पूरी कोशिश की। यह किसी से ज्यादा मुझे दुख देता है, लेकिन साफ है कि यह मेरे लिए नहीं है।’ सिर्फ 29 साल की उम्र में मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास का एलान कर दिया। यह किसी चोट या उम्र की वजह से लिया गया फैसला नहीं था। यह लगातार असफलताओं और अपने ऊपर बढ़ते दबाव से टूटे एक महान खिलाड़ी का फैसला था।
- मेसी के इस फैसले पर पूरी दुनिया में प्रतिक्रिया हुई। उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने भी अर्जेंटीना के कप्तान के दर्द को समझने की कोशिश की।
- रोनाल्डो ने उस समय कहा था, ‘मेसी ने एक कठिन फैसला लिया है और लोगों को इसे समझना चाहिए।’ उन्होंने मेसी की पेनल्टी मिस होने पर भी उनका बचाव किया था।
- रोनाल्डो ने कहा था, ‘वह हार और निराशा के आदी नहीं हैं, यहां तक कि दूसरे स्थान पर रहना भी उनके लिए आसान नहीं है। पेनल्टी मिस करने से कोई खराब खिलाड़ी नहीं बन जाता।’
- यह मेसी-रोनाल्डो प्रतिद्वंद्विता का एक अलग चेहरा था। मैदान पर दोनों के बीच वर्षों तक सर्वश्रेष्ठ बनने की जंग चली, लेकिन उस समय रोनाल्डो ने अपने प्रतिद्वंद्वी के दर्द को समझा।
- उन्होंने मेसी की आंखों में आंसू देखने पर भी दुख जताया और उम्मीद की कि अर्जेंटीना के लिए वह दोबारा मैदान पर लौटेंगे। रोनाल्डो की यह बात कुछ ही समय बाद सच साबित हुई।
- रोनाल्डो ने तब कहा था, ‘मेसी को रोते हुए देखना दुख देता है और मुझे उम्मीद है कि वह अपने देश के लिए वापस लौटेंगे, क्योंकि अर्जेंटीना को उनकी जरूरत है।’
मेसी ज्यादा समय तक अर्जेंटीना से दूर नहीं रह सके और उसी साल के अंत में उन्होंने वापसी की। देश, प्रशंसकों और टीम के साथियों का प्यार उन्हें वापस ले आया। लेकिन उनकी वापसी सिर्फ एक वापसी नहीं थी, बल्कि एक ऐसी कहानी की शुरुआत थी, जिसका अंत फुटबॉल इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
- 2021 में मेसी ने अर्जेंटीना के साथ कोपा अमेरिका का खिताब जीता। ब्राजील के खिलाफ माराकाना स्टेडियम में मिली जीत ने उनके करियर के सबसे बड़े दर्द को खत्म किया, लेकिन असली मंजिल अभी बाकी थी।
- 2022 में कतर में मेसी ने वह कर दिखाया, जिसका इंतजार अर्जेंटीना और उनके प्रशंसक वर्षों से कर रहे थे। लुसैल स्टेडियम में फ्रांस के खिलाफ फाइनल में अर्जेंटीना ने पेनल्टी शूटआउट में जीत दर्ज की और मेसी ने विश्व कप ट्रॉफी उठा ली।
- जिस खिलाड़ी ने 2016 में कहा था कि वह अपने देश के लिए जीत नहीं सकता, वही छह साल बाद दुनिया के सबसे बड़े मंच पर विश्व चैंपियन बन चुका था। इसके बाद अर्जेंटीना ने 2024 में भी कोपा अमेरिका जीता।
- यानी जिस मेसी के लिए 2016 में अर्जेंटीना की जर्सी दर्द का प्रतीक बन गई थी, उसी जर्सी में उन्होंने दुनिया और दक्षिण अमेरिका दोनों पर राज किया।
- करीब 10 साल बाद मेसी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को अलविदा कह दिया। 2026 विश्व कप के फाइनल में अर्जेंटीना को स्पेन से अतिरिक्त समय तक चले मुकाबले में हार मिली। यह मैच मेसी का अर्जेंटीना के लिए आखिरी मैच साबित हुआ।
- इस बार तस्वीर पूरी तरह अलग थी। 2016 में मेसी के आंसुओं में पछतावा और अधूरापन था। 2026 में उनकी आंखों में एक लंबे सफर के खत्म होने का भाव था। वह उस टीम को छोड़ रहे थे, जिसके साथ उन्होंने विश्व कप, कोपा अमेरिका और कई बड़े गौरव हासिल किए।
- इस बीच उनके पिता और लंबे समय तक सलाहकार रहे जॉर्ज मेसी के निधन ने इस विदाई को और भावुक बना दिया। इसके बाद मेसी ने अर्जेंटीना की जर्सी से अपना रिश्ता खत्म करने का फैसला किया। अपने अंतिम संदेश में उन्होंने लिखा, ‘यह ऐसा फैसला है जो मेरी आत्मा को दुख देता है, लेकिन मैं जानता हूं कि अब समय आ गया है।’
- उन्होंने आगे कहा, ‘मैं कसम खाता हूं कि मैंने हमेशा अपना सब कुछ दिया। सिर्फ उन पिछले वर्षों में नहीं, जब हमने सब कुछ जीता, बल्कि उससे पहले भी। मैंने खुद को पूरी तरह दे दिया है; अब मेरे पास देने के लिए कुछ नहीं बचा।’ और फिर सबसे भावुक पंक्ति आई, ‘ऊपर वाले का शुक्र है कि उन्होंने मुझे अर्जेंटीनी बनाया।’
मेसी की दोनों विदाइयों के बीच सबसे बड़ा अंतर यही है। 2016 में उन्होंने इसलिए संन्यास लिया था क्योंकि उन्हें लगा कि वह अर्जेंटीना को वह नहीं दे पाए, जिसकी उससे उम्मीद थी। वह खुद को टीम की लगातार असफलताओं का हिस्सा मान रहे थे। 2026 में उन्होंने इसलिए कदम पीछे खींचे क्योंकि वह सब कुछ दे चुके थे। पहली बार मेसी हार से भागना चाहते थे। दूसरी बार वह जीत के शिखर से विदा हुए। पहली बार रोनाल्डो ने उनसे लौटने की अपील की थी।
उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही मेसी आने वाले वर्षों में कोपा अमेरिका और विश्व कप जीतकर अपनी कहानी को पूरा करेंगे। मेसी की कहानी इसलिए खास है क्योंकि इसमें सिर्फ जीत नहीं है। इसमें हार है, टूटना है, वापसी है, आलोचना है, आंसू हैं और आखिर में वह मुकाम भी है, जहां एक खिलाड़ी अपने देश की जर्सी को सिर ऊंचा करके अलविदा कह सकता है। 2016 का मेसी कह रहा था, ‘मैं नहीं कर सका।’ 2026 का मेसी कह रहा है, ‘मैंने सब कुछ दे दिया।’ और शायद यही इन दोनों संन्यासों के बीच की पूरी कहानी है।