पटना-बोधगया में आलीशान ऑफिस, नोट गिनने की मशीनें:3-8 महीने में पैसे डबल करने का दावा; जानिए CA ने कैसे बनाया 100 करोड़ की ठगी का साम्राज्य

मैंने श्रीधर की कंपनी में 50 लाख रुपए इन्वेस्ट किए थे। पैसे वापस करने का समय पूरा हुआ तो श्रीधर और कंपनी दोनों भाग गए। इस दौरान बेटी की तीन बार शादी सिर्फ रुपए के अभाव में टूट गई। अब पड़ोसियों से कर्ज लेकर बेटी की शादी कर रहा हूं।’

यह कहना है उस पीड़ित पिता का, जिसने रिटायरमेंट के बाद मिले अपने सारे पैसे श्रीधर पाठक की कंपनी में निवेश कर दिए थे। पटना में रुपए डबल करने के नाम पर लोगों से करीब 100 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रीधर पाठक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद दर्जनों पीड़ितों का दर्द सामने आया है।

श्रीधर पाठक करीब दो साल से फरार चल रहा था। वह विदेश भागने की तैयारी में था, लेकिन इससे पहले ही पटना पुलिस ने उसे लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया और पटना ले आई।

आखिर श्रीधर पाठक का ठगी का पैटर्न क्या था? वह लोगों को अपने साथ कैसे जोड़ता था? उसने कितना आलीशान ऑफिस बनवाया था? ठगी के शिकार लोगों ने क्या बताया?

सबसे पहले जानिए श्रीधर करता क्या था

श्रीधर पाठक एक रिटायर्ड अधिकारी का बेटा है और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट है। करीब 6-7 साल पहले वह ट्रेडिंग के कारोबार में आया। चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर काम करते हुए उसके मन में ज्यादा पैसे कमाने और ट्रेडिंग के जरिए बड़ा कारोबार खड़ा करने का ख्याल आया।

इसके बाद उसने अपनी कंपनी ‘न्यू एरा ट्रेडिंग हाउस’ शुरू की। कंपनी में 3-4 स्टाफ के अलावा फील्ड में भी कर्मचारियों की टीम तैयार की। ये कर्मचारी लोगों से संपर्क कर उन्हें कंपनी में पैसे निवेश करने के लिए तैयार करते थे।

3 से 8 महीने में पैसे डबल करने का देता था प्लान

लोगों के मुताबिक, पाठक अपने जानने वाले लोगों के साथ नेटवर्किंग जैसे चेन तैयार करता था। वे लोग अपने जानने वाले लोगों को इसके पास लाते थे। आने वाले लोगों को प्लान समझाया जाता, ताकि वो इन्वेस्ट कर सके।

3 से 6 महीने में रुपए डबल करने जैसा प्लान था। अगर कोई व्यक्ति 50 लाख रुपए इंवेस्ट करता तो उसे 3 महीने में एक करोड़ रिटर्न देने की बात कही जाती थी।

आलीशान ऑफिस, रुपए गिनने के लिए 4 मशीनें थीं

श्रीधर पाठक का दफ्तर किसी कॉरपोरेट ऑफिस से कम नहीं था। आलीशान दफ्तर में रुपए गिनने के लिए चार मशीनें लगी थीं। रिसेप्शन पर लड़की बैठती थी, जबकि अंदर राजू और पार्टनर पंकज पटेल जैसे लोग मौजूद रहते थे। बाहर रुपए जमा करने वालों की लंबी लाइन लगी रहती थी।

दफ्तर की चकाचौंध, कर्मचारियों की मौजूदगी और बड़े स्तर पर पैसों का लेन-देन देखकर लोगों को भरोसा हो जाता था। इसी माहौल का फायदा उठाकर लोगों को ट्रेडिंग के नाम पर निवेश के लिए आकर्षित किया था।

पटना के बाद बोधगया में भी खोला था दफ्तर

श्रीधर ने पटना के दीघा गेट नंबर-93 के पास आलीशान ऑफिस खोला था। इसके लिए वह हर महीने 50 हजार रुपए किराया देता था। ऑफिस के अंदर उसके लिए 3-4 लोग काम करते थे। उसका मुख्य पार्टनर पंकज पटेल है, जो पेशे से सरकारी शिक्षक है।

आरोप है कि पंकज ने अपने रिश्तेदारों को जोड़कर निवेश की चेन तैयार की। इसके अलावा श्रीधर के लिए फील्ड में भी कई लोग काम करते थे। इनका काम लोगों को इस ट्रेडिंग चेन से जोड़ना था। फील्ड में काम करने वाले लोग जितने लोगों को इस चेन से जोड़ते थे, उन्हें उसी हिसाब से कमीशन मिलता था।

जिस पार्टनर के साथ काम शुरू किया, उसके ही रिश्तेदार ने की शिकायत

पटना से जाने के बाद दोनों ने बोधगया के दुमोहना में भी आलीशान कार्यालय खोला और कान्हा अपार्टमेंट में किराए पर फ्लैट लिया। यह फ्लैट एक DSP का बताया जा रहा है। इसी दौरान पंचानपुर थाने में कुंदन रावत ने शिकायत दर्ज कराई। कुंदन, पंकज पटेल का बहनोई है। कुंदन ने बताया कि करीब 95 लाख रुपए निवेश किए थे। समय पूरा होने के बाद पैसे नहीं लौटाए तो थाने में केस दर्ज कराया।

पूर्व विधायक ने भी किया है निवेश

पुलिस के अनुसार, कुंदन के अलावा गया के एक पूर्व विधायक भी निवेश किया है। मामले की जांच के लिए कोतवाली थाने की पुलिस ने EOU को पत्र लिखा है। पुलिस श्रीधर को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी में है।

श्रीधर पटना और गया से गायब होने के बाद लखनऊ के गोमतीनगर विकास खंड में किराए पर रह रहा था। पूछताछ में उसने पत्नी के नाम पर SIM लेकर दोबारा ट्रेडिंग शुरू करने की बात कही।

जून 2026 में श्रीधर के खिलाफ पहली शिकायत हुई

श्रीधर करीब 2 साल से फरार था। कंपनी में इंवेस्ट करने वाले लोग उसे खोज रहे थे। कॉन्टैक्ट करने की कोशिश कर रहे थे। जब कॉन्टैक्ट नहीं हुआ तो सबसे पहले जून 2026 में पहली पुलिस शिकायत कोतवाली में हुई। इसके बाद दूसरा मामला सितंबर 2026 में गयाजी से आया, जो श्रीधर के पार्टनर पंकज के जीजा ने किया था। इसके बाद पुलिस एक्टिव हुई और आरोपी को गिरफ्तार किया।

अब पढ़िए 4 केस स्टडी जिन्होंने पाठक की कंपनी में इन्वेस्ट किए

केस- 1: पीड़ित दानापुर के मुस्ताक अहमद ने कहा, मैं प्राइमरी स्कूल का टीचर था। रिटायरमेंट के रुपए से बेटी की शादी की धूमधाम से प्लानिंग की थी। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। मेरे जानने वाले आस पड़ोस के लोग शेयर मार्केट में रुपये इन्वेस्ट कर के डबल मुनाफा कमा रहे थे। शुरू में इनलोगों को देखकर मैंने भी कुछ रुपए श्रीधर पाठक की कंपनी में इन्वेस्ट किए। किश्तवार मैंने 9 लाख और इसके बाद 2.5 लाख निवेश किए। इसका 11 महीने तक मुझे फायदा भी मिला। इससे विश्वास बढ़ता चला गया।

केस- 2: दानापुर के रामानंद पंडित ने कहा, दीघा थाना क्षेत्र में 93 नंबर के गेट के पास श्रीधर पाठक का आलीशान दफ्तर था। शेयर मार्केट में 6 महीने के अंदर रुपए डबल करने 100 प्रतिशत प्रॉफिट प्लान समझाकर इन्वेस्ट करा रहा था। इसके बताए अनुसार सबकुछ विजिबल था। दिख रहा था कि लोगों के मुनाफे मिल रहे हैं।

इसी चक्कर में मैंने 1.72 करोड़ रुपए इन्वेस्ट कर दिए। कुछ रुपए कोतवाली इलाके के मौर्या कॉम्प्लेक्स के पास दिए थे। कुछ रुपए इसके आदमी राजू को दिए। पहली किश्त मिली और उसके बाद फरार हो गया। पिछले डेढ़ साल से थाने का चक्कर लगा रहे थे। अंत में कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई।

केस- 3: अरमान हुसैन ने बताया, श्रीधर को मैं नहीं जानता था। मुझे यहां नासरीगंज के रहने वाला पंकज पटेल लेकर गया था। उससे जुड़ने के बाद दफ्तर में जाने से पता चला कि शेयर मार्केट में ट्रेडिंग होती है। मुझे समझाया गया कि यहां 3 महीने और 6 महीने में डबल रुपए हो जाते हैं। मंथली 10 प्रतिशत के भी प्लान बताए गए। मैंने इसे देखकर 2 करोड़ रुपए इन्वेस्टमेंट कर दिए।

1 साल तक मुझे अलग-अलग जमा रुपए के मुनाफे भी दिए। मुनाफे जब मुझे मिलने लगें तो दोस्त रिश्तेदारों को भी इन्वेस्ट करने के लिए प्रेरित किया।

केस- 4: पीड़ित कारोबारी पंकज चौहान ने कहा, श्रीधर पाठक का घर मेरे घर से 3 किलोमीटर दूर है। दानापुर मार्केट में आना जाना होता था। मार्केट के दूसरे लोग रुपए डबल करने के लिए इन्वेस्टमेंट कर रहे थे। उन्हें मुनाफे भी अच्छे आ रहे थे।शुरुआती दिनों में मैं भी 20 लाख इन्वेस्ट किए।

इन्वेस्ट के बाद 5 से 6 महीने तक मुनाफा खूब आया। इसी चक्कर में बिजनेस के लिए जमा किए लगभग 2 करोड़ इन्वेस्ट कर दिया। आज स्थिति यह हो गई है कि मार्केट में बिजनेस करने के लिए रुपए नहीं है। सड़क पर आ गया हूं।

पुलिस मामले की जांच कर रही है

लॉ एंड ऑर्डर ASP कृष्ण मुरारी प्रसाद ने बताया, नोटिस देने के बाद भी सामने नहीं आ रहे थे। इसके बाद न्यायालय से वारंट लेकर अरेस्ट किया है। इनके खिलाफ मल्टीपल आवेदन आ रहे हैं। अच्छे तरीके से जांच के लिए इनकम टैक्स, इकनॉमिक ऑफेंस की भी मदद ली जाएगी।

जुटाई गई रकम कहां गई, पुलिस कर रही छानबीन

पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि निवेश के नाम पर जुटाई गई रकम कहां-कहां भेजी गई और इस पूरे नेटवर्क में उसके साथ और कौन लोग जुड़े थे।

मामले में पुलिस आर्थिक लेनदेन, बैंक खातों और निवेश से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।