राहुल ने 48 में से 14 घंटे सड़क पर बिताए:जमीन पर बैठकर खाना खाया; तीन बार हिरासत में; पिछले 3 साल में सबसे ज्यादा एक्टिव

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR रद्द करने की मांग को लेकर राहुल गांधी लगातार दो दिन सड़क पर उतरे। 48 घंटों में उन्होंने 14 घंटे से ज्यादा प्रदर्शन में बिताए।

6 अक्टूबर को राहुल, प्रियंका और विपक्षी सांसदों ने आकाशवाणी परिसर में करीब 8 घंटे धरना दिया। इस दौरान राहुल पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर खाना खाते नजर आए। पुलिस ने उन्हें दो बार हिरासत में लिया।

7 अक्टूबर को राहुल ने विपक्षी सांसदों के साथ लंच किया और फिर जंतर-मंतर के लिए बस से रवाना हुए। पुलिस ने रास्ते में बस रोकी तो राहुल सड़क पर खड़े हो गए। नहीं हटने पर पुलिस उन्हें जबरन उठाकर ले गई और हिरासत में लिया। करीब दो घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

2023 में भारत जोड़ो यात्रा खत्म होने के बाद यह उनका सड़क पर सबसे बड़ा प्रदर्शन रहा। बीच में वे छोटे प्रदर्शनों में शामिल होते रहे हैं।

साल 2026 ऐसा है जब राहुल पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा एक्टिव हैं। 2024 में उन्होंने सिर्फ एक बड़े प्रदर्शन में हिस्सा लिया। वहीं 2025 में भी उन्होंने विपक्ष के साथ एक मार्च निकाला था। जबकि इस साल वे नीट पेपर मुद्दे के प्रदर्शन में छात्रों के साथ हुए व्यवहार और SIR के विरोध में 4 महीनों में चार बड़े विरोध जता चुके हैं या प्रदर्शन में हिस्सा लिया है।

6 अक्टूबर 2026: संसद से चुनाव आयोग तक मार्च और 9 घंटे का धरना

1. संसद से चुनाव आयोग की ओर मार्च

राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक के विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर मार्च पर निकले। मुख्य मुद्दे SIR, वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग थे। विपक्ष चाहता था कि चुनाव आयोग उसकी शिकायतें सुने।

2. पुलिस ने बैरिकेड लगाकर मार्च रोका

मार्च को NITI Aayog के पास रोक दिया गया। राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़ गए और तिरंगा लहराया। कई अन्य विपक्षी नेताओं को भी पुलिस ने रोककर हिरासत में लिया।

3. राहुल-प्रियंका आकाशवाणी भवन पहुंचे

मार्च रुकने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए। वहां दूसरे विपक्षी सांसद भी उनके साथ जुड़ गए। उन्होंने चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग करते हुए वहीं धरना शुरू कर दिया।

4. करीब 9 घंटे तक धरना चला

राहुल गांधी ने धरने के दौरान मीडिया से बात की और कहा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े हैं। विपक्ष चाहता था कि करीब 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिले। लेकिन ECI ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने औपचारिक रूप से मुलाकात का अनुरोध नहीं किया था। बाद में आयोग ने कहा कि 240 सांसदों को संसद परिसर में मिलने का प्रस्ताव उसके निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं था।

5. रात में पुलिस ने धरना खत्म कराया, हिरासत में लिया

करीब 8-9 घंटे बाद पुलिस ने आकाशवाणी भवन परिसर खाली कराया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक करीब 260 लोगों, जिनमें 10 सांसद शामिल थे, को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

7 अक्टूबर 2026: जंतर-मंतर जाने की कोशिश और फिर हिरासत

1. विपक्ष ने अगले दिन भी आंदोलन जारी रखा

6 अक्टूबर के बाद विपक्ष ने आंदोलन खत्म नहीं किया। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के सांसदों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का कार्यक्रम बनाया। मांग वही रही—SIR पर सवाल, वोटर लिस्ट से जुड़े आरोप और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।

2. लंच करके सांसद बसों में जंतर-मंतर के लिए निकले

करीब 300 सांसदों के एकजुट होने की बात सामने आई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से सांसदों के लिए लंच भी आयोजित किया गया। इसके बाद विपक्षी सांसद बसों में जंतर-मंतर की ओर रवाना हुए।

3. जंतर-मंतर से पहले ही पुलिस ने बसें रोक दीं

दिल्ली पुलिस ने बसों को जंतर-मंतर से करीब 100 मीटर पहले रोक दिया। वहां भारी पुलिस और RAF की तैनाती थी। प्रदर्शनकारियों ने बसों से उतरकर सड़क पर विरोध शुरू कर दिया। कुछ कांग्रेस सांसद बसों की छत पर भी चढ़ गए।

4. सड़क पर ही प्रदर्शन, राहुल और प्रियंका हिरासत में

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बनी। प्रियंका गांधी सड़क पर बैठ गईं। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया। राहुल ने इस दौरान कहा कि उनके खिलाफ दर्ज हर FIR उनके लिए “मेडल” जैसी है और वह CEC के इस्तीफे की मांग जारी रखेंगे।

राहुल-कांग्रेस की 4 रणनीति, 2 चुनौतियां… मोदी सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक अभियान में बदलना

  • SIR को कांग्रेस सिर्फ वोटर लिस्ट की प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रखना चाहती। उसका लक्ष्य इसे वोट के अधिकार और चुनाव की निष्पक्षता से जोड़कर मोदी सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक अभियान में बदलना है।
  • दिल्ली में राहुल चेहरा हैं, जबकि पार्टी का अगला फोकस ब्लॉक, गांव और बूथ तक पहुंचने का है। यानी राहुल की सड़क की राजनीति को कांग्रेस के जमीनी संगठन से जोड़ना इस अभियान की अहम रणनीति है। इन आंदोलन से कैडर लेवल को लगातार एक्टिव रखा जा सकता है।
  • CEC और SIR जैसे राष्ट्रीय मुद्दे पर लगातार आंदोलन की अगुआई करके राहुल INDIA ब्लॉक की साझा लड़ाई में खुद को विपक्ष का चेहरा बनाना चाहते हैं।
  • अगर यह अभियान लंबे समय तक चलता है, तो कांग्रेस के पास 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट, SIR और चुनावी पारदर्शिता को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने का आधार होगा। यानी अभी का आंदोलन सिर्फ तत्काल विरोध नहीं, आगे के चुनावों के लिए नैरेटिव तैयार करने की कोशिश भी है।

विपक्ष को एकजुट रखना बड़ी चुनौती

  1. कांग्रेस राहुल को आंदोलन का चेहरा बनाना चाहती है, लेकिन 6 अक्टूबर के प्रदर्शन में ही सहयोगी दलों के साथ समन्वय पर सवाल उठे। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल-प्रियंका का आकाशवाणी भवन में अचानक धरना सहयोगियों से चर्चा के बिना हुआ और पूरा फोकस गांधी परिवार पर चला गया। तमिलनाडु जैसे राज्यों में सहयोगी दलों के साथ मतभेद भी सामने आए हैं। इसलिए विपक्ष को एकजुट रखना भी कांग्रेस की रणनीति और चुनौती दोनों है।
  2. राजनीतिक नारा तभी टिकेगा जब कांग्रेस यह दिखा पाए कि कितने वास्तविक मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटे और उनके पास कितने सत्यापित मामले हैं। दूसरी तरफ ECI का कहना है कि SIR में हटाए गए नामों में मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट मतदाता शामिल हैं और छूटे लोगों के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।