NEET छात्रा का सुसाइड, लिखा- मेरा दिमाग मुझे डराता है:अनचाहे थॉट्स बहुत डरावने हैं, मेरी जिदंगी तबाह कर रहे; 8 पेज में लिखा दर्द

प्रयागराज में पिता की लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारकर NEET छात्रा रितु शर्मा ने सुसाइड कर लिया। सुसाइड से पहले छात्रा ने 8 पेज का सुसाइड नोट लिखा।

छात्रा ने लिखा- मेरा दिमाग अनचाहे विचारों से भरा रहता है। ये विचार इतने परेशान करते हैं कि मैं ढंग से पढ़ाई नहीं कर पा रही हूं। एक ही चीज को बार-बार दोहराने के लिए मजबूर करता है। ऐसा नहीं करने पर मेरा दिमाग मुझे डराता है कि कुछ बुरा हो जाएगा।

मैं गहरी निराशा और दुख में हूं। मैं इतने सालों से यह सब फेस कर रही हूं। अब मैं थक चुकी हूं। ये अनचाहे थॉट्स नकारात्मक और डरावने हैं। जो मेरी जिदंगी को पूरी तरह तबाह कर रहे हैं। मैं खुद के बारे में बहुत बेकार महसूस करती हूं। इसलिए मैं सुसाइड कर रही हूं।

सोमवार को सुसाइड किया, कमरे की खिड़की तोड़कर अंदर घुसे परिजन

गाजीपुर के रहने वाले रिटायर्ड इंजीनियर डॉ. देवराज शर्मा करीब छह साल पहले प्रयागराज गए थे। उन्होंने झूंसी थाना क्षेत्र के त्रिवेणीपुरम के गंगा सेक्टर में मकान बनवाया। इसमें वह अपनी पत्नी और जुड़वां बच्चे रितु और ऋषिराज के साथ रहते हैं।

सोमवार शाम करीब 4 बजे घरवालों ने रितु को आवाज दी। जवाब न मिलने पर कमरे की खिड़की तोड़ी गई। तब परिवार ने देखा कि रितु की लाश फर्श पर पड़ी थी। चारों तरफ खून फैला था।

बगल में पिस्टल थी। उसने खुद के सिर में गोली मार ली थी। परिवार ने बताया कि छात्रा मानसिक तनाव से गुजर रही थी। फोरेंसिक टीम को कमरे से 8 पेज का एक सुसाइड नोट मिला। जिसमें उसने मानसिक बीमारी OCD (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) का जिक्र किया।

ACP अरुण कुमार पराशर ने बताया कि छात्रा के पिता डॉ. देव राज शर्मा के पास .32 बोर पिस्तौल और .315 बोर राइफल है। गृह मंत्रालय और अरुणाचल प्रदेश के जिला प्रशासन ईस्ट सियांग ने इसे ऑल इंडिया लाइसेंस दिया था।

अनचाहे थॉट्स बहुत डरावने हैं, मैं कमजोर महसूस करती हूं

छात्रा ने लिखा कि मुझे NEET 2025 और NEET 2026 में मिले अंकों के पीछे मेरी मानसिक समस्या एक बड़ा कारण है। मैं पिछले 2 सालों से ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) जैसी समस्या से जूझ रही हूं।

इसकी शुरुआत 11वीं और 12वीं कक्षा के दौरान हुई। पहले मुझे समझ नहीं आता था कि मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है।

मैं इसे सामान्य ओवरथिंकिंग और एंग्जायटी समझती थी, लेकिन कुछ सप्ताह पहले इंटरनेट पर इसके बारे में पढ़ने के बाद मुझे पता चला कि मेरे अनुभव OCD के लक्षणों से मिलते-जुलते हैं।

इस समस्या से मेरे दिमाग में बार-बार अनचाहे विचार और शंकाएं आती हैं। खासकर पढ़ाई करते समय ये विचार मुझे बहुत परेशान करते हैं। कई बार मैं किसी विषय को पहले ही अच्छी तरह पढ़ चुकी होती हूं।

लेकिन मेरा दिमाग मुझे उसी चीज को दोबारा पढ़ने और समझने के लिए मजबूर करता है। मुझे डराता है कि अगर मैंने उसे बार-बार नहीं दोहराया, तो परीक्षा में मुझसे गलती हो जाएगी या मैं असफल हो जाऊंगी।

जब मैं अपने दिमाग के कहे अनुसार बार-बार चीजें दोहराती या चेक करती हूं, तो मुझे कुछ समय के लिए मानसिक राहत मिलती है। मेरी घबराहट और डर थोड़े कम हो जाते हैं। लेकिन यह राहत स्थायी नहीं होती।

कुछ समय बाद वही विचार और शंकाएं फिर आने लगती हैं। मैं चाहकर भी इससे बाहर नहीं निकल पा रही हूं। मैं खुद को असहाय, कमजोर और आत्मविश्वास की कमी से घिरा हुआ महसूस करती हूं।

मुझे लगता है कि मैं दूसरों से पीछे रह गई हूं और शायद अपने जीवन के लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाऊंगी।

छात्रा ने लिखा- मेरे साथ ही ऐसा क्यों

कई बार मेरे मन में यह सवाल आता है कि “Why me? आखिर मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है? मैं बस अच्छे से पढ़ना चाहती हूं, सामान्य जिंदगी जीना चाहती हूं और एक शांत दिमाग चाहती हूं। अपनी पढ़ाई पूरी कर अपने करियर के लक्ष्य हासिल करना चाहती हूं।

मुझे लगता है कि मैं इस OCD के साथ अपनी लाइफ में कभी कुछ बड़ा नहीं कर पाऊंगी। इसलिए मैं आखिर में सुसाइड कर रही हूं। मुझे माफ कर देना।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रितु ने जान देने से पहले कुल दस पन्नों का सुसाइड नोट लिखा था। इनमें से दो पन्नों को उसने काट दिया था।

सोनभद्र मेडिकल कॉलेज में मिली थी MBBS सीट

रितु ने प्रयागराज में डीपीएस से 2022 में हाईस्कूल और 2024 में इंटरमीडिएट किया था। इसके बाद उसने NEET की तैयारी शुरू की थी। 2026 में हुए NEET एग्जाम में उसकी ऑल इंडिया रैंक 10,74,272 आई थी।

सोमवार को उसे सोनभद्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में ईडब्ल्यूएस-दिव्यांग (EWPH) कोटा के तहत MBBS सीट आवंटित की गई है।

छात्रा की आंखों में दिक्कत, मानसिक बीमारी भी थी

रितु की आंखों में दिक्कत थी। इसलिए उसका दिव्यांग सर्टिफिकेट बना था। साथ ही वह ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर से पीड़ित थी। इस बीमारी में व्यक्ति के मन में बार-बार कुछ अनचाहे विचार आते हैं। इन विचारों से होने वाली बेचैनी कम करने के लिए वह कुछ काम बार-बार करने लगता है या ऐसा करने के लिए मजबूर महसूस करता है।

OCD के प्रमुख लक्षण

इसमें एक ही तरह के विचार बार-बार आना, उन विचारों से चिंता या घबराहट होना और बेचैनी कम करने के लिए एक ही काम बार-बार करना शामिल है। जब ये विचार और आदतें व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों या रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।