धनतेरस से ठीक एक दिन पहले निगरानी ने मुजफ्फरपुर के कार्यपालक पदाधिकारी सुशील कुमार के पटना में एम्स के पास भुसौला, दानापुर स्थित फ्लैट, सहरसा स्थित आवास और मुजफ्फरपुर स्थित कार्यालय में छापेमारी की।
1.58 करोड़ डीए का केस दर्ज करने के बाद निगरानी ने शाम 5 बजे से करीब 6 घंटे तक छापेमारी की। जिसमें सुशील और उनकी पत्नी चांदनी गुप्ता के नाम से जमीन-फ्लैट के 6 कागजात मिले हैं। इसकी कीमत करीब 1.38 करोड़ रुपए है। इसके अलावा सुशील कुमार के खातों में 28.54 लाख रुपए बैंक में जमा हैं। सुशील पर आय से 110 प्रतिशत अवैध संपत्ति अर्जित करने का डीए का केस दर्ज किया गया है।
सुशील कुमार मूल रूप से सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर थाना के तरियामा गांव के रहने वाले हैं। परिवार पटना में एम्स के पास भुसौला दानापुर में रहता है। तीनों ठिकानों पर निगरानी की 20 सदस्यीय टीम ने अलमारी से लेकर फाइलों तक को खंगाला डाला।
छह अचल संपत्तियों का पता चला
निगरानी की प्रारंभिक जांच में सुशील कुमार, उनकी पत्नी चांदनी गुप्ता और परिजनों के नाम पर छह अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है।
इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 1 करोड़ 37 लाख 71 हजार 400 रुपए बताई गई है। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों में करीब 28 लाख 54 हजार रुपए जमा होने की जानकारी मिली है।
ज्ञात आय से 110% अधिक संपत्ति का आरोप
निगरानी ब्यूरो के मुताबिक, सुशील कुमार के पास ज्ञात आय के स्रोतों से 110 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। इसी आधार पर निगरानी थाने में कांड संख्या 131/26 दर्ज किया गया है। इसके बाद विशेष निगरानी न्यायालय से तलाशी वारंट लेकर तीनों ठिकानों पर छापेमारी की गई।
आवास और डेढ़ करोड़ के गहनों की जानकारी छिपाई
साल 2025-26 के हलफनामे में सुशील ने पटना के भुसौला दानापुर स्थित आवास को छिपाया था। उन्होंने केवल सहरसा के तरियामा और गंगजला में मकान बताए थे। 19 किलो चांदी और 900 ग्राम सोने को हलफनामे में पैतृक बताकर काली कमाई को वैध करने का प्रयास किया गया। बिना पारिवारिक बंटवारा पत्र के इतनी भारी संपत्ति जुटाना संदेहास्पद है।