‘मैं पिछले 50 साल से तंबाकू मुक्त हूं। धारावाहिक रामायण करने से पहले मैं चेन स्मोकर था। मैं दिनभर गुटखा चबाता था। जिस दिन ‘रामायण’ मेरे जीवन में आई। उस दिन से मैंने सब कुछ छोड़ दिया। मैं तंबाकू मुक्त हो गया। तब से लेकर आज तक मैं तंबाकू से दूर हूं।’
ये बात बुधवार को लोकसभा में मेरठ -हापुड़ लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद अरुण गोविल ने कही। दरअसल लोकसभा में तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाने संबंधी विधेयक पर चर्चा हुई। अरुण गोविल ने कहा- मैं इस बिल का समर्थन करता हूं। मैं इस विधेयक के समर्थन में बोलने के लिए इसलिए खड़ा हूं क्योंकि मैं तंबाकू मुक्त हूं।
ये बिल युवा पीढ़ी को तंबाकू की लत से दूर करेगा
उन्होंने कहा- हम सब जानते हैं कि तंबाकू खाना सिर्फ एक आदत नहीं है। यह एक गंभीर समस्या है। तंबाकू का सेवन कैंसर आदि जानलेवा बीमारियों का कारण बनता है। सरकार का यह कदम हेल्थ सिक्योरिटी को मजबूत करने वाला है। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है कि ताकि लोग तंबाकू का सेवन कम करें। युवा पीढ़ी इस लत से दूर रहे।
इस बिल का उद्देश्य है सरकार के राजस्व को सुरक्षित रखना है। यह बिल से समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी लाएगा। ये जनता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। तंबाकू पर बढ़ा टैक्स लोगों को इससे दूर रखने में मदद करेगा। देश में बीमारियों के बोझ को कम करेगा।
यह बिल कैंसर जैसी बीमारियों को बढ़ने से रोकने का यह एक अच्छा कदम है।
फैन की डांट के बाद छूटी सिगरेट
एक इंटरव्यू में अरुण गोविल ने खुलासा किया था कि एक बार वह एक तमिल बाइलिंगुअल फिल्म की शूटिंग कर रहे थे तभी शूटिंग के दौरान उन्हें सिगरेट की तलब लगी। उस वक्त वो चेन स्मोकर हुआ करते थे तो वो कोने में जाकर सिगरेट पीने लगे।
एक शख्स किसी अन्य भाषा में उन्हें भला बुरा कहने लगा तभी उन्होंने पास खड़े दूसरे व्यक्ति से पूछा कि वो शख्स उन्हें क्या कह रहा है? तब उन्हें मालूम चला कि वो व्यक्ति उनका फैन था लेकिन उन्हें सिगरेट पीता देख उसे गुस्सा आ गया और वो बोला कि हम आपको भगवान मानते हैं और आप सिगरेट पी रहे हैं। इस घटना के बाद अरुण गोविल ने बताया कि उन्होंने कभी सिगरेट को हाथ नहीं लगाया।
संविधान संशोधन पर भी दे चुके हैं बयान
16 अप्रैल, 2024 को अरुण गोविल ने कहा था- जब तक भाई-भाई के जज्बे का फील नहीं जागेगा, तब तक अखंड भारत नहीं बन पाएगा। भगवान श्रीराम के सारे आदर्श ऐसे हैं, जिन्हें हम फॉलो करें तो हम जीवन में बहुत कुछ पा सकते हैं, राष्ट्र को बहुत कुछ दे सकते हैं और हम सभी को फॉलो भी करने चाहिए।
भाजपा सांसद लल्लू सिंह द्वारा संविधान बदलने के बाबत पूछे गए सवाल के जवाब में अरुण गोविल ने कहा- जब हमारे देश का संविधान बना था तो उस वक्त परिस्थितियों के अनुसार धीरे-धीरे बदलाव हुए। तब की परिस्थितियां कुछ और थीं, आज की कुछ और हैं।
फिलहाल एक व्यक्ति से संविधान चेंज नहीं होता है। सभी की सहमति होगी तभी चेंज होता है। अगर ऐसा कुछ होगा तो चेंज किया जाएगा।
मेरठ में हुआ था अरुण गोविल का जन्म
रामायण में ‘श्रीराम’ का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल के पास स्टारडम के अलावा उनका मेरठ कनेक्शन भी है। उनका जन्म 12 जनवरी, 1958 को मेरठ कैंट में हुआ। उनके पिता चंद्रप्रकाश गोविल मेरठ नगर पालिका से जलकल अभियंता थे।
अरुण गोविल की शुरुआती पढ़ाई मेरठ के एक स्कूल में ही हुई। इसके बाद मेरठ के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
उनके पिता चाहते थे कि वह एक सरकारी कर्मचारी बनें, जबकि अरुण कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिसके लिए उन्हें याद किया जाए। अरुण 6 भाई और 2 बहनों में चौथे नंबर के हैं। गोविल ने अभिनेत्री श्रीलेखा से शादी की है। उनके दो बच्चे हैं, सोनिका और अमल। 1975 में 17 साल की उम्र में अरुण मुंबई आ गए थे, जहां उनके भाई का सैटल्ड बिजनेस था।