राहुल गांधी ने सोमवार को वडोदरा में कहा कि प्रधानमंत्री ने लोकसभा में 25 मिनट का भाषण दिया है लेकिन अमेरिका के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला। मोदी 100% ट्रम्प के कंट्रोल में हैं। मोदी पार्लियामेंट में डिबेट नहीं कर सकते, क्योंकि कम्प्रोमाइज्ड हैं।
अमेरिका में अडाणी पर जो केस है असल में वो नरेंद्र मोदी को धमकाने के लिए है। अमेरिका का नरेंद्र मोदी को सीधा मैसेज है कि ज्यादा ऊटपटांग हरकत की तो समझ लेना। ट्रम्प ने साफ कहा है- मैं मोदी का करियर खत्म कर सकता हूं।
नरेंद्र मोदी ने ट्रम्प से कहा- हम आपसे पूछे बिना किसी से तेल और नेचुरल गैस नहीं खरीदेंगे। अगर ट्रम्प कहेंगे कि रूस, ईरान, वेनेजुएला से तेल नहीं खरीदना है तो नहीं खरीदेंगे। आप जो हुक्म करेंगे, हम वही करेंगे।
राहुल ने वडोदरा में ‘आदिवासी अधिकार संवाद’ कार्यक्रम में कहा- आदिवासी का मतलब है- हिंदुस्तान के असली मालिक। यहां की ‘जल-जंगल-जमीन’ आपकी है। लेकिन RSS-BJP एक नया शब्द लेकर आई है- ‘वनवासी’, जिसका मतलब है कि आप सिर्फ जंगल में रहते हैं। ‘जल-जंगल-जमीन’ के मालिक नहीं हैं।
राहुल गांधी की स्पीच की 6 बड़ी बातें…
- ट्रम्प-मोदी पर- ट्रम्प कहता है कि भारत-पाकिस्तान का युद्ध उसने रुकवाया। ट्रम्प ने हमारी सेना का अपमान किया। ट्रम्प कहता है कि भारत के 7 जहाज गिरे तो उसने युद्ध रुकवाया। ये बात ट्रम्प ने 50 बार बोली। ट्रम्प के सामने नरेंद्र मोदी ‘चूं’ तक नहीं कर सकते। ट्रम्प ने नरेंद्र मोदी को कंट्रोल कर रखा है। इसके दो कारण हैं, पहला एपस्टीन और दूसरा अडाणी। नरेंद्र मोदी और BJP का पूरा फाइनेंशियल स्ट्रक्चर अडाणी है। नरेंद्र मोदी ने देशभर के पोर्ट, एयरपोर्ट, सीमेंट कंपनी, सोलर पॉवर, विंड पॉवर और सारा इन्फ्रास्ट्रक्चर अडाणी को सौंप दिया।
- अडाणी पर- अडाणी जी की कंपनी की सूची खोलिए, वरिष्ठ प्रबंधन को देखिए, आपको एक भी आदिवासी नहीं मिलेगा। निजी अस्पतालों की सूची देखिए, मालिकों की सूची देखिए, कॉलेजों-विश्वविद्यालयों की सूची देखिए, कॉरपोरेट्स की सूची देखिए। इसमें आदिवासी कहां हैं?
- ट्रेड डील पर- मोदी ने ट्रेड डील के जरिए भारत का कृषि क्षेत्र अमेरिका के लिए खोल दिया है। भारत में 1-2 या 5 एकड़ के छोटे खेत हैं और हाथ से काम होता है, जबकि अमेरिका में 5000, 10000 एकड़ के बड़े खेत और मशीनों से खेती होती है। ऐसे में अगर अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत आए तो किसानों को नुकसान हो सकता है। इस फैसले में दाल, सोयाबीन, फल और कपास जैसे कई कृषि उत्पाद शामिल बताए जा रहे हैं। पहले सरकार इस पर सहमत नहीं थी, लेकिन अब इसे लागू करने की बात सामने आई है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
- आदिवासियों पर- जब भी विकास की बात होती है तो उसका नुकसान आदिवासियों को उठाना पड़ता है। आदिवासियों की जमीन सीधे तौर पर हड़प ली जाती है। मनरेगा आपको सुरक्षा देने के लिए थे। आपने भविष्य की बात थी।
- आदिवासियों की जमीन पर- नरेंद्र मोदी और BJP के लोग बिरसा मुंडा जी की मूर्ति के सामने हाथ जोड़ते हैं, लेकिन वो उन्हीं विचारों पर हमला करते हैं, जिनके लिए बिरसा मुंडा जी ने लड़ाई लड़ी और शहीद हुए। जब BJP आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन को छीनती है तो वह सिर्फ बिरसा मुंडा जी ही नहीं, संविधान पर भी हमला करती है। आज देश में विकास के नाम पर आदिवासियों की जमीन छीन ली जाती है और मुआवजा भी नहीं दिया जाता। इस सरकार के हिसाब से आदिवासियों के कोई अधिकार ही नहीं हैं।
- जातिगत जनगणना पर- जब भी मैं जातिगत जनगणना की बात करता हूं, BJP-RSS के लोग मेरे ऊपर आक्रमण करते हैं। पहले पब्लिक सेक्टर हुआ करते थे, जिसमें आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों को रिजर्वेशन मिला करता था। लेकिन अब BJP सरकारी संस्थाओं को प्राइवेटाइज कर रही है, जिसमें कुछ चुनिंदा लोगों को ही जगह मिला करेगी।
इसी महीने हो सकता है निकाय चुनाव का ऐलान
गुजरात में नगर निगम और जिला पंचायत चुनावों की घोषणा होने वाली है। राज्य विधानसभा का सत्र 25 मार्च को खत्म हो जाएगा। इसके बाद 26 मार्च गुजरात राज्य चुनाव आयोग लोकल बॉडी चुनावों के लिए शेड्यूल का ऐलान कर सकता है।
इससे पहले राहुल गांधी पिछले साल 12 सितंबर को जूनागढ़ पहुंचे थे, तब उन्होंनें सभी जिला अध्यक्षों के कार्यक्रम को संबोधित किया था। निकाय चुनाव के मद्देनजर राहुल गांधी के दौरे के बाद कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं के बीच गुजरात आने की संभावना व्यक्त की जा रही है।