इस्लामाबाद वार्ता का उद्देश्य
प्रधानमंत्री शरीफ के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य लक्ष्य अमेरिका और ईरान के बीच सभी लंबित विवादों को सुलझाने के लिए एक निर्णायक समझौते तक पहुंचना है। पाकिस्तान ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को आमने-सामने बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, जिससे संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा सके।
ईरान को अमेरिका में कौन पसंद?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी प्रशासन को संकेत दिया है कि वह स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ बातचीत के पक्ष में नहीं है। इसके पीछे कारण पिछली वार्ताओं की विफलता और उसके बाद हुई सैन्य कार्रवाइयों को माना जा रहा है, जिससे ईरान में इन अधिकारियों के प्रति भरोसे की कमी बनी है।
इसके उलट, ईरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को एक अधिक संतुलित और कूटनीतिक दृष्टिकोण वाला नेता मानता है। ईरान को उम्मीद है कि वेंस की भागीदारी से बातचीत अधिक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकती है और संघर्ष को समाप्त करने की संभावना बढ़ सकती है।
पिछली वार्ताओं की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि फरवरी 2026 में जेनेवा में ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता हुई थी, जिसमें स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल थे। शुरुआती स्तर पर कुछ प्रगति के संकेत मिले थे, लेकिन इसके तुरंत बाद अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई किए जाने से हालात बिगड़ गए। ईरान ने इस घटनाक्रम को विश्वासघात माना और इसके बाद विटकॉफ व कुशनर के साथ आगे बातचीत से इनकार कर दिया। यही कारण है कि इस बार ईरान एक नए चेहरे जेडी वेंस के साथ वार्ता को प्राथमिकता दे रहा है।