राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डीडवाना में अम्बेडकर जयंती कार्यक्रम के दौरान भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मानेसर प्रकरण को लेकर एक बार फिर सरकार गिराने की साजिश और करोड़ों रुपए खर्च करने का आरोप लगाया। साथ ही केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग, चुनाव से पहले कांग्रेस के खाते फ्रीज करने और लोकतंत्र- संविधान पर खतरे की बात कही।
मानेसर प्रकरण को बताया सुनियोजित साजिश
अशोक गहलोत ने अपने संबोधन में प्रदेश की राजनीति के चर्चित मानेसर प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल एक राजनीतिक उठापटक नहीं थी, बल्कि लोकतंत्र को अस्थिर करने और चुनी हुई सरकार को गिराने का कुत्सित प्रयास था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने विधायकों को भड़काकर मानेसर भेजा और करोड़ों रुपए खर्च कर लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश की।
मोदी और शाह पर लगाए सीधे आरोप
गहलोत ने कहा कि मानेसर की घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा रचित एक ऐसा संकट था, जिसका उद्देश्य राजस्थान की कांग्रेस सरकार को गिराना था। उन्होंने मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र की सरकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भाजपा अपने मंसूबों में सफल रही, लेकिन राजस्थान में जनता के आशीर्वाद से उनकी दाल नहीं गल सकी।
केंद्रीय एजेंसियों को बताया ‘वॉशिंग मशीन’
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज विपक्ष की आवाज दबाने के लिए इन एजेंसियों को ‘वॉशिंग मशीन’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
चुनाव से पहले खाते फ्रीज करने पर सवाल
गहलोत ने अजित पवार का उदाहरण देते हुए कहा कि जिन पर प्रधानमंत्री ने स्वयं 70 हजार करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था, भाजपा में शामिल होते ही वे ‘पाक-साफ’ हो गए और उन्हें उपमुख्यमंत्री बना दिया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज करना क्या निष्पक्ष चुनाव की निशानी है।
संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर को याद करते हुए गहलोत ने कहा कि आज देश का संविधान और लोकतंत्र दोनों खतरे में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने 70 वर्षों की लोकतांत्रिक परंपराओं को ताक पर रखकर मात्र तीन वर्षों में चुनावी चंदे के माध्यम से अकूत संपत्ति और आलीशान कार्यालय खड़े कर लिए हैं।
गहलोत ने जनता से आह्वान किया कि वे इस चुनाव में सही और गलत का अंतर समझें और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होकर निर्णय लें।