क्‍या भारत में उपलब्‍ध हो सकेगी फाइजर बायोएनटेक की कोरोना वैक्‍सीन? जानें- क्‍यों उठे सवाल और एक्‍सपर्ट व्‍यू

भारत में कोवडि-19 की स्थिति को काफी हद तक नियंत्रण में लाया जा चुका है। लेकिन इसके बाद भी अन्‍य देशों की ही तरह भारत भी कोविड-19 की वैक्‍सीन का इंतजार शिद्दत से कर रहा है। इस बीच ब्रिटेन ने फाइजर और एस्‍ट्राजेनेका की बनाई कोविड-19 वैक्‍सीन को अपने यहां पर इजाजत दे दी है और इसका खाका भी तैयार कर लिया गया है। वहीं इसी कंपनी की वैक्‍सीन के भारत में उपलब्‍धता को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्‍योंकि इस वैक्‍सीन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए इसको 70 डिग्री सेल्सियस में रखना जरूरी है। शुरुआत में कहा ये भी गया था कि भारत में इस तरह से वैक्‍सीन को सिक्‍योर करने की उपलब्‍धता नहीं है। हालांकि जानकार ऐसा नहीं मान रहे हैं।

सरकार से चल रही बात 

आपको बता दें कि फाइजर की प्रवक्‍ता रोमा नायर ने कहा है कि कंपनी भारत को इसकी वैक्‍सीन देने के लिए पूरी तरह से कमेटेड है और इसको लेकर लगातार सरकार से बातचीत चल भी रही है। उनके मुताबिक कंपनी लगातार पूरी दुनिया के देशों की सरकारों से इस बाबत बात कर रही है। उनका ये भी कहना है कि इस वैक्‍सीन को सुरक्षित बनाए रखने के जिन उपकरणों की जरूरत होगी उस पर सरकारों को विचार करना होगा। वो इस बात को लेकर भी आशावान हैं कि भारत में इसको लेकर आ रही दिक्‍कतों को भी दूर कर लिया जाएगा।

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉक्‍टर राजन शर्मा का कहना है कि भारत में इस वैक्‍सीन को सुरक्षित बनाए रखने के पूरे उपाय और उपकरण मौजूद हैं। उनका ये भी कहना है कि जहां पर ये सुविधा उपलब्‍ध नहीं हैं वहां सरकार इसको लेकर पूरी तरह से युद्ध स्‍तर पर काम कर रही है। आपको बता दें कि बीते कुछ दिनों में प्रधानमंत्री ने खुद निजी तौर पर वैक्‍सीन के विकास और भविष्‍य में इनके रखरखाव को लेकर तैयारियों का जायजा लिया है। राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों से हुई बैठक के दौरान भी उन्‍होंने कहा था कि राज्‍य इसके लिए जरूरी उपाय करें और इसमें पूरी मुस्‍तैदी के साथ आगे बढ़ें।

सभी खुराक हो चुकी हैं बुक 

गौरतलब है कि कोविड-19 की वैक्‍सीन को लेकर ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय यूनियन ने पहले से ही करोड़ों खुराक का ऑर्डर दे रखा है। अकेले यूएस की ही तरफ से करीब एक अरब खुराक का ऑर्डर दिया जा चुका है। वहीं ईयू ने 2 अरब और ब्रिटेन ने 4 करोड़ खुराक का ऑर्डर दिया है। इसका अर्थ ये भी है कि कंपनी के पूरे प्रोडेक्‍शन को फिलहाल वर्ष 2021 तक के लिए बुक कर लिया गया है। कहा जा रहा है कि भारत ने अभी तक इसकी बुकिंग नहीं की है और न ही इसके रखरखाव को लेकर कोई इंतजाम ही किए हैं।

क्‍यों उठे सवाल 

कंपनी के मुताबिक इस वैक्‍सीन को रखने के लिए अल्‍ट्रा-कोल्‍ड स्‍टोरेज की जरूरत पड़ेगी। साथ ही इसको दूर दराज के स्‍थानों पर भी उपलब्‍ध कराने के लिए ऐसी ही व्‍यवस्‍था करनी होगी। इस बारे में डॉक्‍टर राजन शर्मा का कहना है कि भारत काफी समय से दूर-दराज के स्‍थानों पर वैक्‍सीनेशन करता रहा है। इस बार भी ऐसा ही होगा और जिस तरह से पहले किया जाता था वैसा ही आगे भी किया जा सकेगा। इसमें हाईली इक्‍यूप्ड व्‍हीकल कारगर भूमिका में रहेंगे, जिसमें वैक्‍सीन सुरक्षित रहेगी। वहीं इसकी कीमत को लेकर भी विशेषज्ञ कुछ असमर्थता जता चुके हैं। आईसीएमआर के महानिदेशक एनके गांगुली का कहना है कि इसकी कीमत काफी अधिक है।