नालंदा में बेरोजगार युवकों को ठग रहे साइबर फ्रॉड:विदेश-निजी कंपनियों में नौकरी का देते लालच, मोबाइल भी हैक कर लेते

नालंदा जिले में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को साइबर ठग निशाना बना रहे हैं। नालंदा के साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने इस पूरे नेटवर्क और ठगी के तौर-तरीकों का खुलासा करते हुए आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है।

उन्होंने बताया कि जॉब फ्रॉड मुख्य रूप से 2 तरीकों से किया जा रहा है। पहले तरीके में युवाओं को विदेश में आकर्षक नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता है। इसके तहत बकायदा उनका मेडिकल टेस्ट तक करा लिया जाता है, जिससे अभ्यर्थी को पूरी प्रक्रिया वैध लगे।

हालांकि, मेडिकल के बाद इंटरव्यू और जॉइनिंग के स्तर पर गिरोह का कोई अता-पता नहीं रहता और युवाओं को ठगी का अहसास होता है। वहीं, दूसरे तरीके में देश के भीतर ही किसी निजी या छोटी कंपनी में नौकरी दिलाने का सपना दिखाया जाता है।

एपीके फाइल भेजकर मोबाइल हैक करते

साइबर डीएसपी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े में जालसाज तकनीकी सेंधमारी और मनोवैज्ञानिक दबाव दोनों का सहारा लेते हैं। ठग दस्तावेज और फॉर्म भरने के बहाने अभ्यर्थियों को एक फाइल भेजते हैं, जो अक्सर एपीके (APK) फॉर्मेट में होती है।

जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को खोलता है, उसका मोबाइल फोन कॉम्प्रोमाइज यानी हैक हो जाता है। इसका मकसद फोन के सिस्टम में घुसकर बैंकिंग और निजी डेटा चुराना होता है।

इसके अलावा, दूसरे तरीके में ठग वास्तविक दिखने वाले फॉर्म भेजकर भरोसा जीतते हैं और फिर पंजीकरण, मेडिकल या अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर 15-15 हजार रुपए रकम बार-बार मांगते रहते हैं। इस तरह किस्तों में युवाओं से मोटी रकम ऐंठ ली जाती है और अंत में कुछ भी हासिल नहीं होता।

आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन करें

डीएसपी ऋषभ आनंद ने युवाओं और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के झांसे में न आएं। किसी भी सरकारी नौकरी के लिए केवल आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन और तय भर्ती प्रक्रिया पर ही भरोसा करें।

इसी तरह, निजी कंपनियों के मामले में भी उनकी अधिकृत वेबसाइट और आधिकारिक प्रक्रिया का ही पालन करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अज्ञात बिचौलिए के माध्यम से नौकरी पाने की कोशिश न करें और किसी भी अज्ञात स्रोत से भेजी गई एपीके या संदिग्ध फाइल को फोन में इंस्टॉल करने से बचें।