पंजाब में सरकार बदलने के बाद भी खन्ना के कारोबारी राजदीप नागरा चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मण समेत छह लोगों के खिलाफ सीबीआई की FIR में नागरा का नाम आया है। उनकी राजनीतिक पहुंच भी जांच के घेरे में है।
सीबीआई अधिकारियों की पोस्टिंग-ट्रांसफर, टेंडर और नीतिगत फैसलों को प्रभावित करने के आरोपों की जांच कर रही है। FIR में 2023 से 2026 की गतिविधियों का उल्लेख है। सीबीआई ने कई जगहों पर छापेमारी कर दस्तावेज, मोबाइल और लैपटॉप जब्त किए हैं।
नागरा का नाम ईडी की जांच से भी जुड़ा है, जिसमें नितिन गोहल से पूछताछ हुई थी। गोहल ने बताया कि वह 2022-23 में एक दोस्त के जरिए नागरा के संपर्क में आए थे। नागरा ने पंजाब सरकार के टेंडरों और कामों के लिए गोहल से मदद मांगी थी।
गोहल ने नागरा के कहने पर अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और मिल्कफेड समेत टेंडरों में बदलाव के अनुरोध किए जाने की बात बताई। गोहल ने नागरा को ‘स्टेट पॉलिसी फॉर फूडग्रेन लेबर एंड कार्टेज 2024’ नाम की पीपीटी भेजी थी, जिस पर ईडी ने सवाल उठाए।
कारोबार से सियासी संपर्क तक, जानिए कौन हैं नागरा?
नागरा के संपर्कों की क्यों हो रही चर्चा राजदीप नागरा का एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडी खन्ना में आढ़त का कारोबार है। उसका शैलर भी बताया जा रहा है। वह पूर्व कांग्रेस मंत्री भारत भूषण आशु का करीबी बताया जाता है। 2024 में ईडी ने भी उसे आशु का सहयोगी बताते हुए गिरफ्तार किया था। खन्ना और समराला की कांग्रेस राजनीति में भी नागरा की कई नेताओं से नजदीकी चर्चा में रही है।
कांग्रेस के बड़े नेताओं से नजदीकी वह पूर्व मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली और पूर्व मंत्री करम सिंह गिल के बेटे रुपिंदर सिंह राजा गिल के बेहद करीबी बताए जाते हैं। यही राजनीतिक संपर्क उसकी प्रोफाइल को सिर्फ एक कारोबारी की बजाय सत्ता और संगठन के बीच सक्रिय रहने वाले व्यक्ति के रूप में चर्चा में लाते रहे हैं।
2024 में ED ने किया था गिरफ्तार सितंबर 2024 में पंजाब के बहुचर्चित फूडग्रेन ट्रांसपोर्टेशन और लेबर-कार्टेज टेंडर मामले में ईडी ने नागरा को गिरफ्तार किया था। एजेंसी के मुताबिक, उसने ठेकेदारों से कथित कमीशन लेकर रकम पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु, आरके सिंगला और कुछ सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाने में नागरा की भूमिका की जांच की थी।
अन्य कारोबारी ठिकानों की तलाशी ली गई ईडी ने उन्हें ठेकेदारों और पूर्व मंत्री/सरकारी अधिकारियों के बीच कथित कड़ी बताया था। उस समय ईडी की कार्रवाई खन्ना के इकोलाही गांव से लेकर अनाज मंडी तक पहुंची थी। नागरा के घर, आढ़त और अन्य कारोबारी ठिकानों की तलाशी ली गई थी। इसके बाद उन्हें जालंधर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया।
खन्ना नकली शराब फैक्ट्री में भी आया था नाम खन्ना में कोरोना काल के दौरान कांग्रेस सरकार में बाहोमाजरा में पकड़ी गई नकली शराब फैक्ट्री के मामले में भी नागरा पर आरोप लगे थे। विरोधी दलों ने राजदीप के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की थी। जिस गोदाम में शराब फैक्ट्री चल रही थी, उसका बिजली कनेक्शन राजदीप के कारिंदे के नाम पर था। फैक्ट्री से थोड़ी दूर ही राजदीप का घर था।
दो सरकारें, दो जांच और एक नाम नागरा की कहानी इसलिए चर्चा में है कि उनका नाम पहले कांग्रेस सरकार के दौरान सामने आए टेंडर मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई तक पहुंचा और अब AAP सरकार के कार्यकाल में सामने आए कथित ट्रांसफर-पोस्टिंग और नीति प्रभाव नेटवर्क की CBI जांच में भी दर्ज है।