जबलपुर में मानवता और संवेदना की मिसाल पेश करते हुए एक परिवार ने अपने प्रियजन को खोने के बाद भी पांच मरीजों को नई जिंदगी देने का फैसला किया। नव निवेश कॉलोनी गंगानगर निवासी 40 वर्षीय नरेंद्र रजक सड़क हादसे के बाद ब्रेन डेड हो गए थे।
इस मुश्किल घड़ी में उनकी पत्नी पूजा रजक और परिजनों ने उनके अंगदान की सहमति दी। इसके बाद सोमवार देर रात प्रशासन ने दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंगों को अस्पताल और एयरपोर्ट तक पहुंचाया। नरेंद्र की दो किडनी, लिवर, आंखें और स्किन दान की गई। हार्ट की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उसका प्रत्यारोपण नहीं हो सका।
अहमदाबाद से आई डॉक्टरों की टीम, चार्टर्ड विमान से भेजा लिवर
अंगों के प्रत्यारोपण के लिए जबलपुर से गुजरात तक चिकित्सा नेटवर्क सक्रिय किया गया। मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल के ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. राजेश पटेल के मुताबिक, एक किडनी मेट्रो अस्पताल में ही मरीज को प्रत्यारोपित की जाएगी, जबकि दूसरी किडनी मेडिकल कॉलेज जबलपुर भेजी गई।
लिवर और हार्ट को अहमदाबाद के मरेन्गो सिम्स अस्पताल भेजने की तैयारी थी। इसके लिए अहमदाबाद से पांच सदस्यीय डॉक्टरों की टीम चार्टर्ड विमान से जबलपुर पहुंची थी। टीम में कार्डियक सर्जन डॉ. निकुंज व्यास, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. विकास पटेल, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. चिंता सेठ और दो स्टाफ नर्स शामिल थीं। हालांकि, जांच में हार्ट की स्थिति प्रत्यारोपण के अनुकूल नहीं मिली, इसलिए उसे नहीं ले जाया गया।
दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर रात में कराई एयरपोर्ट की व्यवस्था
अंगों को सुरक्षित रखने और निर्धारित समय सीमा में गंतव्य तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए। पहला मेट्रो प्राइम अस्पताल से अब्दुल हमीद चौक होते हुए डुमना एयरपोर्ट तक बनाया गया। दूसरा अस्पताल से रानी दुर्गावती फ्लाईओवर होते हुए मेडिकल कॉलेज तक तैयार किया गया। एंबुलेंस के आगे पुलिस की गाड़ी चलती रही और पूरे रास्ते को यातायात के लिए खाली कराया गया।
रात में जबलपुर एयरपोर्ट बंद रहता है। ऐसे में प्रशासन ने विशेष अनुमति लेकर नाइट लैंडिंग और एयरपोर्ट संचालन की व्यवस्था कराई, ताकि अहमदाबाद से आई टीम अंगों के साथ समय पर रवाना हो सके।
सुबह 4 बजे लिवर रवाना, अस्पताल में जलाईं मोमबत्तियां
सुबह करीब 4 बजे लिवर को विशेष मेडिकल सुरक्षा के साथ एंबुलेंस से एयरपोर्ट रवाना किया गया। इस दौरान अस्पताल प्रशासन ने मोमबत्तियां जलाकर अंगदान के इस फैसले को श्रद्धांजलि दी। पत्नी पूजा रजक और दोनों बच्चे भावुक हो गए। चार्टर्ड विमान से लिवर को अहमदाबाद भेजा गया। इसके कुछ देर बाद सुबह करीब 4:30 बजे दूसरी एंबुलेंस से किडनी को मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया गया।
हमेशा हेलमेट लगाते थे, हादसे वाले दिन नहीं पहना था
नरेंद्र रजक एचसीएल कंपनी में कार्यरत थे। 31 दिसंबर को वे अपने साले की मृत्यु के बाद गंगा पूजन के लिए कुआंखेड़ा गए थे। परिजनों के मुताबिक, नरेंद्र हमेशा हेलमेट पहनकर ही घर से निकलते थे, लेकिन हादसे वाले दिन उन्होंने हेलमेट नहीं पहना था। घर लौटते समय एक अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। गंभीर हालत में उन्हें मेट्रो प्राइम अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
पत्नी बोलीं- जिनके परिजन ब्रेन डेड हों, वे अंगदान जरूर करें
नरेंद्र की पत्नी पूजा रजक ने इस दुखद घड़ी में दूसरे परिवारों को अंगदान के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “हमारे परिवार ने अपना प्रियजन खो दिया, लेकिन जिनके घर के मरीज ब्रेन डेड होते हैं, उन्हें अंगदान जरूर करना चाहिए। इससे बड़ा कोई दान नहीं है।” परिजनों के इस फैसले से कई जरूरतमंद मरीजों और उनके परिवारों को नई उम्मीद मिली है।