Delhi Water Crisis News: यमुना में गंदा पानी गिरने तक आती रहेगी पेयजल किल्लत की दिक्कत

यमुना में फिर से अमोनिया का स्तर बढ़ने से वजीराबाद, चंद्रावल और ओखला जल शोधन संयंत्र प्रभावित हो गया है। इस कारण बुधवार को मध्य दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली व दक्षिणी दिल्ली के कई इलाके में जल आपूर्ति नहीं होगी। यह पहली बार नहीं है जब राजधानी के लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा हो। यमुना साफ हो और दिल्लीवासियों को स्वच्छ जल मिले इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा, यमुना में गंदा पानी न गिरे इसके लिए हर जरूरी कदम उठाने होंगे।  प्रत्येक वर्ष सर्दी के मौसम में यह समस्या बढ़ जाती है। अमोनिया की मान्य सीमा 0.8 पीपीएम पीपीएम (पा‌र्ट्स पर मिलियन) है, लेकिन प्रदूषण की वजह से कई स्थानों पर यमुना में यह स्तर बढकर इससे बहुत ज्यादा हो जाता है, इस कारण कई बार जल शोधन संयंत्र बंद करने पड़ते हैं।

इस समस्या को देखते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की तरफ से नियुक्त यमुना निगरानी समिति ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण के उन मुख्य स्त्रोतों की पहचान करने को कहा है, जिनके कारण दिल्ली में यमुना में अमोनिया के स्तर में वृद्धि होती है। यह जरूरी भी है। मुख्य कारणों की पहचान कर समस्या हल करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने की जरूरत है।

वहीं, इस समस्या को लेकर सियासत भी खूब होती है। दिल्ली जल बोर्ड इसके लिए हरियाणा सरकार को जिम्मेदार बताता रहा है। उसका कहना है कि बार-बार कहने के बावजूद हरियाणा ने औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी का बहाव रोकने के लिए कदम नहीं उठाए हैं, जिस वजह से दिल्ली में यमुना दूषित हो रही है। यदि पड़ोसी राज्य जिम्मेदारी निभाएं, तो यह समस्या दूर हो सकती है।

दूसरी ओर भाजपा इसके लिए दिल्ली सरकार को कठघरे में खड़ा करती है। लेकिन, इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से समस्या का समाधान संभव नहीं है। यमुना साफ हो और दिल्लीवासियों को स्वच्छ जल मिले इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। यमुना में गंदा पानी न गिरे इसके लिए हर जरूरी कदम उठाने होंगे। दिल्ली जल बोर्ड इस दिशा में काम भी कर रहा है। आम जनता को भी यमुना को साफ रखने में अपना योगदान देना होगा।