हरियाणा में उठ रही मांग- CCTV कैमरे की निगरानी में लाए जाएं कोविड अस्पताल

दिल्ली, गाजियाबाद के बाद गुरुग्राम में हुई रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की घटनाओं ने कोरोना संक्रमित मरीजों के तीमारदारों की चिंता बढ़ा दी है। तीमारदारों की चिंता गुरुग्राम मैक्स अस्पताल के कर्मियों द्वारा मरीजों के लिए मिले रेमडेसिविर इंजेक्शन बाजार में बेचने की घटनाओं ने ज्यादा बढ़ाई है।

मरीजों के रेमडेसिविर इंजेक्शन अस्पताल कर्मियों ने बेचने से तीमारदार चिंतित

तीमारदारों का कहना है कि एक बार अस्पताल में पहुंचे मरीज का हालचाल जानने के लिए भी उन्हें अस्पताल प्रबंधन में उतनी ही सिफारिश करानी पड़ रही है जितनी पहले बेड उपलब्ध कराने के लिए कराई थी। निजी हो या सरकारी किसी भी अस्पताल में कोरोना संक्रमितों से उनके तीमारदारों को मिलने की अनुमति नहीं है। कई अस्पतालों में तो मरीज को मोबाइल फोन रखने पर भी पाबंदी है।

सीसीटीवी कैमरे लगाकर कोरोना वार्ड का लिंक तीमारदारों को उपलब्ध कराया जाए

ऐसे में मरीज से संपर्क या मरीज की हालत जानने के लिए तीमारदारों को मशक्कत करनी पड़ती है। इन चिंताओं के चलते तीमारदार अब बड़े अस्पतालों में अपने मरीजों के हो रहे इलाज की प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहते हैं। तीमारदारों का सुझाव है कि कोरोना वार्ड सीसीटीवी कैमरे की जद में लाए जाएं और वार्ड का दृश्य देखने के लिए आनलाइन लिंक तीमारदारों को उपलब्ध कराया जाए, ताकि तीमारदार अपने मरीज को देख सकें।

‘ मेरे पिता को वैशाली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां सुबह सात बजे तक उनसे मोबाइल फोन पर बात होती रही। अचानक साढ़े सात बजे अस्पताल से फोन आया कि मेरे पिता की तबीयत ज्यादा खराब है और उन्हें आइसीयू में ले जाया जा रहा है। पांच मिनट बाद कह दिया कि वह नहीं रहे। अब इस दौरान अस्पताल पर सिर्फ विश्वास करने के अलावा और कुछ नहीं रह जाता। मगर जब बड़े अस्पतालों के कर्मचारी रेमडेसिविर इंजेक्शन बेच सकते हैं तो फिर अंदर कुछ भी हो सकता है। इसलिए अस्पतालों में हो रहे इलाज के दौरान की मरीज को आनलाइन लाइव देखने में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।

फरीदाबाद।

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‘ डाक्टरों व अस्पतालों की साख में होगा सुधार ‘

” कोरोना संक्रमण के मौजूदा दौर में डाक्टर और इलाज करने वाले सरकारी व निजी संस्थान चाहे वे अस्पताल, नर्सिंग होम हों या फिर मेडिकल कालेज, किसी की कार्यप्रणाली पर अंगुली उठाने का उचित समय नहीं है मगर मरीज के तीमारदारों को इलाज के बारे में जानकारी लेने का तो हक है। चूंकि ज्यादातर मरीज इस समय निजी अस्पतालों में सिफारिश पर भर्ती हैं इसलिए उनके तीमारदार भी चुप रहते हैं। शासन-प्रशासन को फिलहाल डाक्टरों व अस्पतालों की साख में सुधार के लिए इलाज की पारदर्शिता के लिए भी कदम उठाने चाहिए।