एयरपोर्ट के पास 9000 वर्गमीटर जमीन का केस हारा जेडीए:हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण की याचिका खारिज की, आवंटन पत्र जारी करने के निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने टोंक रोड पर एयरपोर्ट प्लाजा स्कीम के पास 9000 वर्ग मीटर जमीन के मामले में जेडीए की विशेष अपील को खारिज कर दिया है। खंडपीठ ने एकलपीठ के 6 अगस्त 2009 के आदेश में दखल से इनकार करते हुए उसे बरकरार रखा है।

अदालत ने जेडीए को निर्देश दिया है कि वह राज्य सरकार के 12 मई 2003 और 19 मई 2003 के आदेश को तत्काल लागू करते हुए प्रार्थी साई दर्शन होटल्स मोटल्स के पक्ष में 9000 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन आदेश जारी करे। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश जेडीए की अपील पर दिए।

15 फीसदी विकसित जमीन का हकदार माना

खंडपीठ ने कहा कि एकलपीठ ने प्रार्थी को 15 फीसदी विकसित जमीन प्राप्त करने का अधिकारी माना है जो सही है। खंडपीठ ने माना कि राज्य सरकार अपने ही निर्णयों से पीछे नहीं हट सकती, खासकर तब जब संबंधित पक्ष ने उन पर भरोसा कर अपने मुकदमे वापस ले लिए हों। प्रार्थी कंपनी ने अपनी तरफ से सभी मुकदमे वापस लेकर शर्तें पूरी कर दी थी। ऐसे में उन्हें 15 प्रतिशत विकसित भूमि देना न्यायसंगत होगा।

जेडीए ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया

जेडीए की ओर से दलील दी गई कि इस जमीन का आवंटन अवैध तरीके से हुआ है और उसे आर्थिक नुकसान होगा। वहीं जेडीए ने इस मामले में भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया, लेकिन खंडपीठ ने जेडीए की दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि इस जमीन के मामले में राज्य सरकार की नीति के अनुरूप आदेश पारित किए गए थे और वे वैध हैं।

मुआवजा तक नहीं मिला

ऐसे में जेडीए की अपील खारिज किए जाने योग्य है। खंडपीठ ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि कई सालों से इस जमीन का उपयोग जेडीए कर रहा है, जबकि मूल मालिकों या उनके उत्तराधिकारियों को उचित मुआवजा तक नहीं मिला। ऐसे में केवल कोर्ट में पैसा जमा कराना भुगतान नहीं माना जाएगा।

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