बहू को नहीं देना होगा सास-ससुर का भरण पोषण:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता की मांग अस्वीकार की, कहा- ऐसा कानून नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुजुर्ग दंपती के बहू से मेंटेनेंस का दावा करने वाली याचिका खारिज को कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अपनी बहू से भरण पोषण पाने का कानूनी अधिकार सास-ससुर को नहीं हैं।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता या पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण पोषण पाने वालों की सूची में सास या ससुर को शामिल नहीं किया गया है। यह फैसला न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने दिया है।

दरअसल, आगरा के राकेश कुमार और एक अन्य की आपराधिक पुनरीक्षण अर्जी दाखिल की थी। इसमें उन्होंने धारा 144 के तहत अपने बेटे की मृत्यु के बाद बहू से मेंटेनेंस की मांग की थी। 21 अगस्त 2025 में फैमिली कोर्ट ने भी दंपती की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद दोनों ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

इस केस में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे ये पता चलता हो कि बहू को नौकरी सहानुभूति के आधार पर मिली थी। नैतिक दायित्व कितना भी मजबूत क्यों न हो, उसे कानूनी जिम्मेदारी नहीं बनाया जा सकता। मेंटेनेंस सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगा, जिनका जिक्र कानून में है।

आगरा के दंपती ने दाखिल की थी याचिका

आगरा निवासी बुजुर्ग दंपती ने याचिका दाखिल की थी। दंपती के वकील ने दलील दी थी कि बुजुर्ग दंपती अनपढ़ हैं। गरीब माता-पिता हैं। वह अपने इकलौते बेटे प्रवेश कुमार पर पूरी तरह निर्भर थे। प्रवेश यूपी पुलिस में कांस्टेबल थे।

प्रवेश की शादी 26 अप्रैल 2016 को हुई थी। 31 मार्च 2021 को उनकी मौत हो गई। प्रवेश कुमार की पत्नी यानी दंपती की बहू भी यूपी पुलिस में कांस्टेबल है। बहू की अच्छी कमाई है। बेटे की नौकरी से जुड़े सर्विस और रिटायरल बेनिफिट्स भी उसे मिले हैं।

फैमिली कोर्ट के आदेश में कोई कमी नहीं

वकील ने कहा कि बहू का अपने सास-ससुर की देखभाल करना नैतिक जिम्मेदारी है। इसे कानूनी जिम्मेदारी भी माना जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि दंपती की मांग धारा 144 के तहत कानूनी तौर पर सही नहीं है। क्योंकि इस कानून में गुजारा भत्ता के लिए सास-ससुर का जिक्र नहीं है। इसलिए फैमिली कोर्ट के आदेश में कोई गलती या कमी नहीं है।

क्या है धारा 144

दंपती ने कानून की धारा 144 के तहत गुजारा भत्ता की मांग की थी। इसके अनुसार, कोई भी साधन संपन्न व्यक्ति अगर अपना भरण-पोषण करने में असक्षम पत्नी, वैध-अवैध बच्चे या माता-पिता को गुजारा भत्ता नहीं देता है तो बीएनएस की धारा 144 के तहत मजिस्ट्रेट उसे ऐसा करने का आदेश दे सकते हैं।