हस्त नक्षत्र और ध्रुव योग में हनुमान जयंती:महावीर मंदिर में विशेष आयोजन, श्रद्धालु की संख्या काउंट करने के लिए बेंगलुरु से आई मशीन

आज चैत्र मास की पूर्णिमा हस्त नक्षत्र और ध्रुव योग में मनाई जा रही है। इसी के साथ आज हनुमान जयंती भी है। इसे लेकर पटना के महावीर मंदिर में विशेष तैयारी है। महावीर के दरबार को विशेष फूलों से सजाया गया है।

मंदिर में हनुमान जयंती के दिन भक्तों की अधिक भीड़ होती है। इस बार काफी संख्या में भक्तों के आने की की उम्मीद की जा रही है। उसके मद्देनजर सरकारी और प्राइवेट सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई गई है।

श्री महावीर मंदिर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने कहा कि मंदिर में आने वाले लोगों की संख्या काउंट करने वाली आधुनिक तकनीक वाली मशीन भी बेंगलुरु से मंगा ली गई है। उसे भी इंस्टॉल किया जा रहा है। जिससे अधिक भीड़ होने पर हेड काउंटिंग मशीन की भी मदद ली जा सके।

इसके साथ ही मंदिर में 80 टन क्षमता वाली एसी मशीन इंस्टॉल किया गया है, ताकि गर्मी से भक्तों को निजात मिले।

महावीर हनुमानजी की आराधना

पंडित भवनाथ झा के मुताबिक वास्तव में महावीर हनुमानजी की आराधना विभिन्न रूपों में होती रही है। वे श्रीराम की कथा के सन्दर्भ में एकमुखी हनुमानजी जी रुद्रावतार हैं तो अन्य पंथ में पंचमुखी के रूप में भी इनकी आराधना होती रही है।

चैत्र पूर्णिमा हिन्दू नववर्ष की प्रथम पूर्णिमा होती है

वहीं, आचार्य राकेश झा ने बताया कि चैत्र पूर्णिमा हिन्दू नववर्ष की प्रथम पूर्णिमा होती है। चैत्र पूर्णिमा पर आज गुरुवार की शाम 04:35 बजे तक हस्त नक्षत्र रहेगा। इसके बाद पूरे दिन चित्र नक्षत्र विद्यमान होगा।

वहीं, आज दोपहर 01:31 बजे तक ध्रुव योग है, फिर इसके बाद व्याघात योग उपस्थित रहेगा। पूर्णिमा की तिथि आज सुबह 06:39 बजे तक है। परंतु उदयातिथि से आज पूरे दिन पूर्णिमा ही रहेगी।

घरों में चालीसा पाठ और कथा-पूजा

आज श्रद्धालु अपने घर और मंदिरों में हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड आदि का पाठ करेंगे। वहीं, भगवान विष्णु के उपासक सत्यनारायण की कथा-पूजा करेंगे। पूजा की शुरुआत प्रत्यक्षदेव भगवान भास्कर को जलार्पण से करेंगे। हिन्दू धर्मावलंबी हनुमान जी को तेल-सिंदूर का लेप, ध्वज दान, रोट प्रसाद का भोग अर्पण कर अपनी पूजा करेंगे।

इस स्तुति से होगी हनुमान की प्रार्थना

अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहम् दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यI सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम् रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ (श्रीरामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड) अर्थात अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत के समान कान्तियुक्त शरीरवाले, दैत्यरूपी वन के लिए अग्निरूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त पवन पुत्र श्री हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूं