सीएम योगी ने शनिवार सुबह 10 बजे वाराणसी से ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ किया। उन्होंने शिवपुर के परिषदीय स्कूल के बच्चों को खुद कंधे पर स्कूल बैग पहनाया। गिफ्ट और किताबें दीं। उनसे हालचाल पूछा। बाद में बच्चों को खुद खाना परोसा।
सीएम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सपा सरकार पर हमला किया। कहा- 2017 से पहले सरकार के एजेंडे में शिक्षा नहीं थी। उनके लोग नकल कराते थे, ताकि उनके स्कूलों में पढ़ाई न हो। इस तरह की कामचलाऊ व्यवस्था से समाज आगे नहीं बढ़ता।
उन्होंने कहा-
तीसरी, चौथी, पांचवीं और छठी के बाद बच्चे स्कूल छोड़ देते थे। किसी भी सड़क से जाओ तो बच्चे दिनभर घूमते मिलते थे। कोई तालाब में, कोई कीचड़ में, तो कोई भैंसों के साथ खेलता मिलता था। हम बच्चों से पूछते थे कि स्कूल क्यों नहीं जा रहे। पता चलता था कि स्कूल दूर हैं।
इससे पहले, सीएम ने काल भैरव के दर्शन किए। चौखट को हाथ से छूकर प्रणाम किया। फिर मंदिर के अंदर प्रवेश करते समय श्रद्धालुओं और पुजारियों को हाथ जोड़कर अभिवादन किया। इसके बाद बाबा विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और बाबा का विधिवत षोडशोपचार विधि से पूजन किया। आरती भी उतारी।
1- ‘स्कूली शिक्षा पर 80 हजार करोड़ से अधिक खर्च’
योगी ने कहा-स्कूली शिक्षा पर हम यूपी में 80 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च करते हैं। इसका रिजल्ट आना चाहिए। जहां कस्तूरबा गांधी स्कूल नहीं थे, वहां इस बजट में हमने पैसा दिया। कस्तूरबा गांधी स्कूलों में 8वीं तक की पढ़ाई थी, जिसके बाद बच्चियां स्कूल जाना बंद कर देती थीं। हमने कहा कि इसे 12वीं तक करेंगे।
2-‘2017 से पहले हमने जर्जर स्कूल भी देखे’
मुझे याद है, जब 2017 में हमारी सरकार बनी थी। हम लोगों ने 1 जुलाई को स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ किया था। उससे पहले मुझे अलग-अलग जिलों में जाने का अवसर मिला था। मैंने बेसिक शिक्षा विभाग के भवनों की जर्जर स्थिति देखी।
बंदी की कगार पर पहुंच रहे स्कूलों के बारे में जानकारी ली। मैं एक स्कूल में गया था, जहां प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है। 10 से कम बच्चे रह गए हैं। नए सत्र में शायद ये बच्चे भी न आएं।
मैंने प्रिंसिपल से पूछा कि आखिर ये बच्चे कहां जा रहे हैं। जवाब मिला-बच्चों में पढ़ने की रुचि नहीं है। तब मैंने प्रिंसिपल से कहा था-बच्चों में पढ़ने की रुचि नहीं है या आप में पढ़ाने की रुचि नहीं है। बच्चों की जिज्ञासा को बढ़ाना ही हमारा काम है।
3- ‘सामाजिक-आर्थिक समानता लानी है तो सबको शिक्षित करना होगा’
योगी ने कहा-याद रखना, सामाजिक और आर्थिक समानता लानी है तो सबको शिक्षित करना होगा। पहले स्थितियां कैसी थीं? स्कूलों में बच्चों का ड्रॉपआउट रेट 19% से ज्यादा हो गया था। लेकिन अब ड्रॉपआउट रेट 19% से घटकर 3% पर पहुंच गया है। हमें इसे 0% पर लाना है।
शिक्षा का मतलब सिर्फ सर्टिफिकेट या डिग्री लेना नहीं होता। शिक्षा इंसान को अच्छे संस्कार देने और सही रास्ता दिखाने का जरिया है। यह जिम्मेदारी ईश्वर ने हमारे गुरुजनों को सौंपी है। अगर शिक्षा इस भूमिका को सही तरीके से निभाए, तो समाज और देश दोनों को अच्छे नतीजे मिलेंगे।
4- ‘1.36 लाख स्कूल सुविधाओं से लैस हुए’
योगी ने कहा-ऑपरेशन कायाकल्प को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया गया। आज ऑपरेशन कायाकल्प की बात होती है तो भारत सरकार के नीति आयोग ने देश में शिक्षा की सक्सेस स्टोरी के रूप में ऑपरेशन कायाकल्प को जगह दी है।
इस ऑपरेशन में 1 लाख 36 हजार से ज्यादा स्कूल सभी सुविधाओं से लैस हुए हैं। ऑपरेशन निपुण से सामान्य शिक्षा के मामले में बच्चों में जिज्ञासा बढ़ी है। हमारे शिक्षकों ने मेहनत की। उसी जर्जर स्कूल में मैं 3 साल बाद गया तो वही प्रिंसिपल थे और 250 से ज्यादा बच्चे थे। प्रिंसिपल का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुआ था।