समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी से पहले ही सोसायटियों में फर्जीवाड़ा करते हुए ज्यादा रकबे का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया। भास्कर ने इस मुद्दे को उठाया तो रिवेरिफिकेशन किया गया। इसमें 55 जिलों में कुल रजिस्टर्ड रकबे में से 20,376 हेक्टेयर रकबे को संदिग्ध मानते हुए कम कर दिया गया है।
अशोकनगर में करीब 2480 हेक्टेयर रकबे को कम किया गया है। इतने रकबे में 1.98 लाख क्विंटल गेहूं की खरीदी होती। इससे समर्थन मूल्य के 52.80 करोड़ रुपए सरकार को चुकाना पड़ते।
इस बार सरकार ने समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2625 रुपए कर दिया है, जबकि बाजार में गेहूं की कीमत दो हजार रुपए के आसपास चल रही है। मुंगावली, पिपरई, बहादुरपुर समेत जिलेभर में जितना रकबा नहीं था, उससे ज्यादा किसानों के रजिस्ट्रेशन कर दिए थे। बाजार का बहुत सारा गेहूं समर्थन मूल्य पर बेचने की तैयारी थी। फर्जीवाड़े में रजिस्ट्रेशन करने वाले, खाद्य, सहकारिता और राजस्व विभाग के कर्मचारी शामिल थे।
कम किया गया रकबा
प्रदेशभर में 11 लाख 38 हजार 911 किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया था। इनमें से 8 लाख 96 हजार 763 किसानों का रिवेरिफिकेशन किया गया, जिसमें पंजीयन में अतिरिक्त रकबा पाया गया। पहले रकबा 19 लाख 73 हजार 57.95 हेक्टेयर था, जो रिवेरिफिकेशन के बाद 19 लाख 52 हजार 681.47 हेक्टेयर हो गया। जिसके चलते 20,376 हेक्टेयर रकबा कम कर दिया गया।
रजिस्ट्रेशन के बाद किसानों के रकबे का रिवेरिफिकेशन कराया गया है। रिवेरिफिकेशन में जिले में 2480 हेक्टेयर रकबा कम हो गया है। जिले में 29 हजार 339.65 हेक्टेयर रकबा था, जो कम होकर 26 हजार 860.18 हेक्टेयर बचा है। जिले में 12 हजार 85 किसानों का पंजीयन समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किया गया है।