सपा प्रमुख अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम केशव मौर्य के बीच वार-पलटवार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अखिलेश यादव ने शनिवार शाम करीब 5 बजे लिखा- एक-दूसरे को पीछे धकेलने की साजिश ही भाजपा की असली सच्चाई है।
इस पर केशव ने करीब आधे घंटे बाद ही पलटवार किया। कहा- लाल टोपी, साइकिल निशान, ‘धक्का-मुक्की’ जिनकी पहचान। नहीं मिलेगा उनको कोई स्थान, 2027 में करेंगे ‘सैफई’ प्रस्थान।
केशव के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी आगे आ गए। उन्होंने X पर लिखा- मेरी आपको सलाह है कि फर्जी बयानों में कुछ नहीं रखा है, जनता सब कुछ जानती है। चुनावों में जनता लगातार आपको आईना दिखाती रहती है। आगामी चुनावों में भी दिखाएगी।
इससे पहले अखिलेश ने शुक्रवार रात ‘X’ पर दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की रील शेयर की। बैकग्राउंड में गाना लगाया कि दुनिया के ठगों से बचना जरा…। साथ ही कैप्शन में तंज कसा। लिखा- दो स्टूलों को मिलाने से कुर्सी नहीं बनती।
इसके 14 घंटे बाद केशव मौर्य ने अखिलेश पर पलटवार किया था। उन्होंने लिखा- फिट और हिट जोड़ी से आपका घबराना जायज है। आपके संरक्षण में वंचित-मजदूर वर्गों पर किए गए अत्याचारों को प्रदेश न भूला है, न ही भूलेगा। जनता कमल खिलाकर हिसाब लेगी।
केशव ने लिखा- हम दोनों की जोड़ी जनता के भरोसे की पहचान
केशव ने शनिवार सुबह 10 बजे ‘X’ पर पटलवार करते हुए लिखा- आपकी जानकारी के लिए यह अच्छा भी है, क्योंकि केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक की जोड़ी आज जनता के भरोसे की पहचान बन चुकी है। मैं महान चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के वंश का प्रतिनिधि हूं। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर अखंड भारत के निर्माण के लिए संकल्पित हूं।
इसके साथ ही करुणावतार भगवान गौतम बुद्ध की विरासत से भी जुड़ा हूं, जिन्होंने संसार को शांति, समता और न्याय का रास्ता दिखाया। लेकिन, योजनाबद्ध तरीके से आपके संरक्षण में शाक्य समाज सहित कुशवाहा, मौर्य, सैनी और अन्य वंचित-मजदूर वर्गों पर किए गए अत्याचारों को प्रदेश न भूला है, न ही भूलेगा।
इन अन्यायों का जवाब आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से कमल खिलाकर दिया जाएगा। 2047 तक विकसित भारत और विकसित यूपी के संकल्प के साथ हर अन्याय का पूरा हिसाब किया जाएगा।
पढ़िए शनिवार शाम अखिलेश ने जो कुछ लिखा
शनिवार शाम करीब 5 बजे अखिलेश ने सोशल मीडिया पर लिखा- यहां भी राजनीति, पहले अपना नाम लिखा फिर उनका। भाजपा में ये चल क्या रहा है? एक-दूसरे को पीछे धकेलने की साजिश ही भाजपा की असली सच्चाई है। वैसे दिखावे के लिए साथ चलते हैं। कृपापात्र पोस्टिंग पर बैठे लोगों को किसी अन्य ‘जीते हुए’ के साथ ऐसा अपमानजनक व्यवहार नहीं करना चाहिए। ये जो दिखाने को चलते हमकदम हैं, दरअसल यही एक-दूसरे का गम है। अब हमें दूसरे ‘उप मुख्यमंत्री’ (DCM) या कहें ‘प्रतीक्षारत मुख्यमंत्री’ (WCM) की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।
अब पढ़िए अखिलेश पर ब्रजेश पाठक का पलटवार
अखिलेश के वार पर पलटवार करते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लिखा- आज के नए उत्तर प्रदेश की सुपर जोड़ी की चर्चा सब जगह है। इसलिए अखिलेश जी मैं आपकी परेशानी को समझ सकता हूं। मेरे परम मित्र और पारिवारिक सदस्य केशव प्रसाद मौर्य और मेरे घर के दरवाजे जनता जनार्दन की सेवा के लिए 24 घंटे खुले हैं। हम बातों से ज्यादा धरातल पर काम करने में भरोसा रखते हैं।
तुष्टिकरण और कुत्सित राजनीति आपकी वही पुरानी नीति है, जनता सब जानती है। कुर्सी मोह से ग्रसित कुत्सित राजनीति का जनता पर असर नहीं होने वाला है। यह नया उत्तर प्रदेश है। यहां विकास भी है, जनता का विश्वास भी है, साथ भी है और आशीर्वाद भी है।
मेरी आपको सलाह है कि फर्जी बयानों में कुछ नहीं रखा है, जनता सब कुछ जानती है। चुनावों में जनता लगातार आपको आईना दिखाती रहती है। आगामी चुनावों में भी दिखाएगी। हम भगवान बुद्ध के शांति, बंधुत्व और सौहार्द के पथ पर सबका साथ, सबका विकास की विचारधारा के साथ अग्रसर हैं। प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए दृढ़संकल्पित हैं। जनता के विश्वास और आशीर्वाद से भाजपा 2027 में फिर सरकार बनाने वाली है।
अखिलेश ने जिस वीडियो को शेयर किया, उसके बारे में जानिए
अखिलेश ने शुक्रवार रात 10 बजे रील शेयर की। इसमें हंसते-मुस्कुराते दोनों डिप्टी सीएम की जुगलबंदी दिख रही है। दोनों पार्क में टहल रहे हैं। बैकग्राउंड में गाना बज रहा है…दुनिया के ठगों से बचना जरा, इनके दिलों में है पाप भरा, इनकी बातों में आना नहीं…।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव मौर्य का यह वीडियो शुक्रवार का बताया जा रहा है। बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर दोनों डिप्टी सीएम कुशीनगर पहुंचे थे। वीडियो में ब्रजेश पाठक कह रहे हैं- हमें भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में आने का मौका मिला है। हमारे साथ हमारे साथी और परिवार के सदस्य केशव मौर्य जी हैं। यह एक अद्भुत संयोग है।
आज अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस भी है। भगवान बुद्ध ने देश को प्रेम और करुणा का संदेश दिया। वह आज भी चिरस्थायी रूप से जागृत है। यह इस धरा पर आकर महसूस हो रहा है। जिस तरीके से भारत आगे बढ़ रहा है, उसे देखकर यह स्पष्ट है। इसलिए मैं कहना चाहता हूं- उठो जवानों, तुम्हें जगाने क्रांति द्वार पर आई है। मोदी जी का बिगुल बज चुका है। जाग उठी तरुणाई है। नमो बुद्धाय।
एक्सपर्ट बोले- अखिलेश नहीं चाहते कि पीडीए का काउंटर आ पाए
- वरिष्ठ पत्रकार और पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रेम कांत त्रिपाठी कहते हैं- अखिलेश ने ठग कह कर करारी चोट की है, वे पीडीए की राजनीति कर रहे हैं। नहीं चाहते कि पीडीए का काउंटर आ पाए। वहीं, केशव ने खुद को भारतीयता, हिंदुत्व के साथ साथ मौर्य वंशज की बताकर जनता को प्राचीन गौरव से जोड़ने की कोशिश की है।
- वे कहते हैं- केशव खुद को चंद्रगुप्त मौर्य तो बता रहे हैं, लेकिन ब्रजेश पाठक को चाणक्य नहीं बता रहे हैं। खास बात ये भी है कि अखिलेश पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। केशव मौजूदा समय में उपमुख्यमंत्री हैं। भाजपा पिछड़े नेता का जवाब पिछड़े नेता से ही दिलवा रही है। मुख्यमंत्री खुद अखिलेश का सीधा जवाब देने से बचते रहे हैं।
पहले भी हो चुका है केशव-अखिलेश टकराव
- केशव और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच आमने-सामने होने की मुख्य वजह राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है, जो ओबीसी वोट बैंक की राजनीति से जुड़ी है। दोनों ओबीसी समाज से आते हैं। दोनों बीच यह कोई पहला टकराव नहीं है। इससे पहले भी कई बार दोनों नेता आमने-सामने आ चुके हैं।
- विधानसभा में भी दोनों नेताओं के बीच तू–तड़ाक भी हो चुकी है। जातिगत जनगणना को लेकर दोनों नेताओं के बीच श्रेय लेने की होड़ सामने आई थी। अखिलेश ने दावा किया था कि यह उनकी पार्टी के दबाव का नतीजा है, जबकि मौर्य ने इसे भाजपा की उपलब्धि बताया था।
- इसके अलावा, महाकुंभ के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी, जब अखिलेश ने संगम के जल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे, और मौर्य ने इसे “सनातन धर्म का अपमान” करार दिया था।
- अखिलेश, केशव को दिल्ली का प्यादा और दिल्ली के वाई-फाई का पासवर्ड भी कह चुके हैं। जिसका जवाब मौर्य ने सपा को विलुप्त होने की कगार पर बताकर दिया था। केशव समय समय पर समाजवादी पार्टी को समाप्तवादी पार्टी कह कर भी संबोधित करते रहे हैं।
अखिलेश ने लोकसभा चुनाव के बाद केशव पर हमले तेज किए
जानकारों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में अखिलेश का PDA का फॉर्मूला सफल रहा है। सपा के 37 सांसदों में से 23 पिछड़े वर्ग से हैं। इनमें 7 कुर्मी, 6 यादव, 2 मौर्य-कुशवाहा, 2 निषाद, लोधी, शाक्य और राजभर समाज से एक-एक सांसद है। भाजपा के 33 में से मात्र 9 सांसद पिछड़े वर्ग के हैं। उसके बाद से अखिलेश ने केशव पर हमले तेज कर दिए। अखिलेश कभी उन्हें ‘दिल्ली का मोहरा’ बताते हैं, तो कभी ‘सौ लाओ सरकार बनाओ’ का ऑफर देते हैं।