भाजपा 2027 का विधानसभा चुनाव विकास बनाम विपक्ष नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रवाद बनाम विभाजनकारी राजनीति’ के नैरेटिव पर लड़ने जा रही है। सीएम योगी ने 7 मई को सहारनपुर के देवबंद की धरती से इसके संकेत दिए।
योगी ने जिस अंदाज में विकास परियोजनाओं के साथ कानून व्यवस्था, फतवा संस्कृति, दंगे, हिंदुत्व और बंगाल की जीत को जोड़ा, राजनीति के जानकार उससे यही कयास लगा रहे हैं। योगी ने अपने भाषण में इन शब्दों का जिक्र क्यों किया। पश्चिमी यूपी में योगी की रैली के राजनीतिक मायने क्या हैं? आइए विस्तार से पढ़ते हैं…
फतवा, पलायन, दंगे और हिंदुत्व का जिक्र
सहारनपुर के देवबंद में हजारों करोड़ रुपए की परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के मंच से सीएम योगी ने बार-बार ‘फतवे’, ‘दंगे’, ‘तुष्टिकरण’, ‘कांवड़ यात्रा’, ‘कानून व्यवस्था’ और ‘राष्ट्रभावना’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। सीएम ने देवबंद का जिक्र केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं रखा।
उन्होंने सीधे कहा- ‘पहले देवबंद से फतवे जारी होते थे’, ‘पश्चिम यूपी जल रहा था’, ‘दंगे हो रहे थे’, ‘कैराना में पलायन हो रहा था’, लेकिन ‘डबल इंजन सरकार ने तस्वीर बदल दी।’ सीएम ने अपने भाषण में ‘वंदे मातरम्’, ‘राष्ट्रीय अस्मिता’, ‘कांवड़ यात्रा’, ‘जन्माष्टमी’ और ‘भारत विरोध’ जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
राजनीति के जानकार मानते हैं कि सीएम का ये बयान केवल प्रशासनिक उपलब्धि गिनाने के लिए नहीं था, बल्कि 2027 से पहले हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था की उसी राजनीति को दोबारा धार देने की कोशिश माना जा रहा है, जिसने 2017 और 2022 में BJP को पश्चिम यूपी में बड़ी बढ़त दिलाई थी।
‘जाति-तुष्टिकरण की राजनीति को नकार रही जनता’
- सीएम ने अपने भाषण में पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी का जिक्र करते हुए कहा कि जनता अब ‘विकास और सुशासन’ को वोट दे रही है। ‘जाति और तुष्टिकरण की राजनीति’ को नकार रही है।
- राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बयान सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सामाजिक समीकरणों को चुनौती देने वाला है।
- योगी ने जिस तरह कहा कि ‘समाज विभाजित नहीं होगा, बल्कि विभाजनकारी ताकतों को दफन कर देगा’, उससे साफ है कि BJP 2027 में जातीय समीकरणों के मुकाबले हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की व्यापक पहचान को फिर केंद्र में लाना चाहती है।
‘विकास + हिंदुत्व’ का डबल नैरेटिव
पश्चिमी यूपी हमेशा से चुनावी लिहाज से संवेदनशील और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण वाला इलाका माना जाता रहा है। मुजफ्फरनगर दंगे, कैराना पलायन और सहारनपुर हिंसा जैसे मुद्दों ने यहां की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया।
अब BJP इसी क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, रैपिड रेल, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और धार्मिक पर्यटन परियोजनाओं के जरिए विकास का बड़ा मॉडल खड़ा करने की कोशिश कर रही है। सीएम ने गंगा एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल, एयरपोर्ट और मां शाकंभरी कॉरिडोर का जिक्र कर साफ संकेत दिया कि 2027 में ‘विकास + हिंदुत्व’ का डबल नैरेटिव पार्टी की रणनीति का केंद्र होगा।
माफिया मुक्त, दंगा मुक्त और कर्फ्यू मुक्त
योगी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि ‘आज उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त, दंगा मुक्त और कर्फ्यू मुक्त है।’ ये बयान सीधे तौर पर विपक्षी दलों के शासनकाल पर हमला था। BJP लगातार यह नैरेटिव बनाती रही है कि 2017 से पहले प्रदेश में अपराध, सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक संरक्षण का माहौल था, जबकि मौजूदा सरकार ने ‘कठोर शासन’ स्थापित किया।
कोर समर्थक वर्ग को सीधा संदेश
वरिष्ठ पत्रकार रियाज हाशमी का कहना है कि राजनीतिक तौर पर देवबंद का अपना अलग महत्व है। इस्लामिक शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र से योगी का ‘फतवा संस्कृति’ पर हमला और ‘राष्ट्रवाद’ की जोरदार वकालत, BJP के कोर समर्थक वर्ग को सीधा संदेश है।
2027 के लिहाज से यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि BJP जानती है कि चुनाव जीतने के लिए केवल विकास ही आधार नहीं हो सकता। उसे भावनात्मक और वैचारिक मुद्दों की भी जरूरत होगी। देवबंद की धरती से दिया गया यह भाषण उसी व्यापक चुनावी स्क्रिप्ट का हिस्सा माना जा रहा है।
वरिष्ठ पत्रकार रियाज हाशमी का कहना है- सांप्रदायिक बातें सीधे तौर कह नहीं सकते हैं। बौधिक रूप से ध्रवीकरण करने की कोशिश करते हैं। अगर देवबंद आएंगे तो फतवों का जिक्र नहीं करेंगे ये संभव नहीं। योगी का भाषण ये संकेत दे रहा है कि 2027 विधानसभा चुनाव किस लाइन पर लड़ा जाएगा।
रियाज हाशमी का कहना है कि 2027 में BJP केवल सड़क, बिजली और रोजगार की बात नहीं करेगी, बल्कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को भी उतनी ही मजबूती से चुनावी विमर्श का हिस्सा बनाएगी।