नागौर में सीए ने अपने साथियों के साथ मिलकर रिटायर्ड डॉक्टर को तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजने और मानव तस्करी में शामिल होने का आरोप लगाया। नाम हटाने की एवज में 34 लाख ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए।
करीब 1 महीने बाद रिटायर्ड डॉक्टर परिजनों को घटना के बारे में बताया। डॉक्टर ने कहा- मैं इतना परेशान था कि सुसाइड करने वाला था। इसके बाद घरवालों के साथ जाकर मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने दिल्ली से 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामला नागौर साइबर थाना इलाके का है।
CA निकला मास्टरमाइंड
नागौर साइबर थाना DSP धर्म पूनिया ने बताया- गोटन निवासी रिटायर्ड डॉक्टर जस्साराम (67) को 28 से 30 दिसंबर तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगों ने 34 लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए।
21 जनवरी 2026 को परिजनों और रिश्तेदारों ने जब उनको गुमसुम और टेंशन में देखा तो पूछताछ की। इसके बाद उन्होंने अपनी आपबीती बताई और गुरुवार को CA सलमान, मास्टरमाइंड योगेंद्र, खाता देने वाले विवेक और इमरान को दिल्ली से गिरफ्तार किया।
अश्लील मैसेज और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के नाम से डराया
धर्म पूनिया ने बताया- साजिश 28 दिसंबर को शुरू हुई थी। ठगों ने डॉक्टर को फोन कर खुद को बेंगलुरु का IPS संदीप दीवान बताया। कहा- उनके खिलाफ क्राइम ब्रांच में मुकदमा दर्ज है। महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजने और सदाकत खान नाम के मानव तस्कर (Human Trafficker) के साथ मिलकर 3 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोप है।
महिला ने धमका कर 3 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा
आरोपियों ने कॉल पर एक महिला से रिटायर्ड डॉक्टर की बात करवाई। महिला ने खुद को IG बोनी बताया। उसने कॉल पर कहा- डॉक्टर को तुरंत गिरफ्तार कर लो। इसके बाद 28 दिसंबर से 30 दिसंबर तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा।
FD तुड़वा कर RTGS किया
केस रफा-दफा करने के नाम पर ठगों ने पीड़ित से 34 लाख रुपये की मांग की। ठगों के दबाव में आकर पीड़ित ने बैंक जाकर अपनी 34 लाख रुपये की एफडी (FD) तुड़वाई और बताए गए बैंक खातों में आरटीजीएस (RTGS) के जरिए रकम ट्रांसफर कर दी।
सुसाइड करने वाले थे
आरोपियों को रुपए ट्रांसफर करने के बाद डॉक्टर ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन परिजनों और रिश्तेदारों ने जब उनको गुमसुम और टेंशन में देखा। इस पर उनसे पूछा तो उन्होंने पूरी बात बताई। इसके बाद 21 जनवरी को मामला दर्ज करवाया। डॉक्टर ने परिजनों को बताया कि वे इतने परेशान थे कि सुसाइड करने वाले थे।
पीड़ित की शिकायत पर नागौर पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि रकम दिल्ली के खातों में ट्रांसफर हुई है।
फर्जी IG और IPS की तलाश जारी
पुलिस की जांच में सामने आया कि CA सलमान और योगेंद्र इस डिजिटल अरेस्ट के मास्टरमांइड थे। विवेक और इमरान ने अपने खातों में ठगी का अमाउंट जमा करवाया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विभिन्न खातों में जमा 12 लाख रुपए समय रहते फ्रीज करवा दिए। हालांकि, फर्जी IPS और IG बनने वाले मुख्य किरदार अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिनकी तलाश में छापेमारी जारी है।