झांसी में दरोगा भर्ती परीक्षा देने गए 23 सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इन सभी ने बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी ली और परीक्षा देने पहुंच गए। छुट्टी के बाद वापस आकर ड्यूटी जॉइन की।
विभाग ने आंतरिक जांच कराई तो पोल खुल गई। SSP बीबी जीटीएस मूर्ति ने 19 मार्च को कार्रवाई की, लेकिन सोमवार को मामला सामने आया। SSP ने बिना इजाजत लिए और झूठ बोलकर गलत तरीके से छुट्टी लेने को अनुशासनहीनता माना है। उन्होंने विभागीय जांच के भी आदेश दे दिए हैं।
बता दें कि 14 और 15 मार्च को यूपी पुलिस में दरोगा के 4,543 पदों के लिए लिखित परीक्षा हुई थी।
‘परीक्षा देने के लिए अनुमति इजाजत लेना जरूरी’
यूपी पूर्व DGP सुलखान सिंह के बताया- परीक्षा फॉर्म भरने के लिए इजाजत जरूरी नहीं होती, लेकिन परीक्षा देने के लिए अनुमति ली जाती है। इसके लिए ली जाने वाली छुट्टी संबंधित पुलिसकर्मियों को साल भर में मिलने वाली छुट्टी से कटती है। अगर किसी ने झूठ बोल कर छुट्टी ली है तो उसे अनुशासनहीनता माना जाता है। विभागीय जांच होती है।
उन्होंने बताया कि जांच में दोषी पाए जाने पर कैरेक्टर रोल में बैड इंट्री दर्ज की जाती है। यानी संबंधित पुलिसकर्मी की सर्विस बुक में निगेटिव पॉइंट जुड़ जाता है। सजा के तौर पर पुलिसकर्मी को तीन साल तक प्रमोशन नहीं मिल सकता। उसे कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। अगर सिपाही है, तो उसे थाने के बजाय पुलिस लाइन में ही तैनात रखा जाता है।