पंजाब के सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू हुए दो साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक प्रशिक्षित नर्सरी शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में इन कक्षाओं को एलिमेंट्री टीचर ट्रेनिंग (ETT) शिक्षक संभाल रहे हैं, जो खुद मानते हैं कि उन्हें इस आयु वर्ग के बच्चों को पढ़ाने का विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला है।
दरअसल, 2024-25 सत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत पहली बार सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू की गई थीं। इससे पहले स्कूलों में केवल दो साल का किंडरगार्टन सिस्टम (LKG और UKG) ही था। नर्सरी जुड़ने के बाद अब बच्चों को पहली कक्षा से पहले तीन साल का फाउंडेशन कोर्स देने का लक्ष्य रखा गया है।
नर्सरी में दाखिले का न्यूनतम आयु 3 साल
नर्सरी में दाखिले के लिए बच्चों की न्यूनतम उम्र 3 साल तय की गई है। हालांकि कक्षाओं के विस्तार के बावजूद इनके लिए अलग से कोई शिक्षक नियुक्त नहीं किए गए हैं। ऐसे में पहले से LKG और UKG संभाल रहे शिक्षकों को ही नर्सरी की जिम्मेदारी भी दी गई है।
शिक्षकों का कहना है कि नर्सरी के बच्चों को खास देखभाल, धैर्य और अलग तरीके की पढ़ाई की जरूरत होती है। सरकारी प्राइमरी स्कूल, मंगली ऊंची के एक शिक्षक और गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन के सदस्य ने कहा कि ETT शिक्षकों को नर्सरी शिक्षा का विशेष प्रशिक्षण नहीं दिया जाता।
उन्होंने कहा कि पहले इस उम्र के बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों में जाते थे, लेकिन अब उन्हें स्कूलों में लाया गया है। ऐसे में उनके लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों की जरूरत है, जो फिलहाल स्कूलों में उपलब्ध नहीं हैं।
स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्कूल
एक अन्य शिक्षक ने बताया कि पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्कूलों पर इसका अतिरिक्त बोझ पड़ा है। उन्होंने कहा कि “कई शिक्षक गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगे रहते हैं। ऐसे में नए काम के साथ स्टाफ बढ़ाना जरूरी है, नहीं तो पूरा सिस्टम प्रभावित होता है”।
अब तक 10 हजार से ज्यादा एडमिशन
वहीं, शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में जिले के प्राइमरी स्कूलों में अब तक 10 हजार से ज्यादा दाखिले हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल विशेष शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है, लेकिन भविष्य में इस पर विचार किया जा सकता है।