प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने ‘मन की बात’ प्रोग्राम के 133वें एपिसोड में में जैसलमेर के रेगिस्तान में चल रहे गोडावण को बचाने के प्रयासों की तारीफ की। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड हमारे रेगिस्तानी इलाकों की पहचान रहा करती थी। एक समय इनकी संख्या बेहद कम रह गई थी। हालत ये थी कि ये पक्षी लुप्त होने की कगार पर पहुंच गए थे। लेकिन, अब इनके संरक्षण के लिए अभियान चल रहा है। प्रजनन केंद्र बनाए जा रहे हैं। अब नए जीवन की शुरुआत दिखाई दे रही है।
DFO बोले- ये हमारे लिए गर्व की बात
DFO (DNP) बृजमोहन गुप्ता ने बताया- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हमारे काम को नोटिस करना पूरी टीम के लिए गर्व की बात है। सुदासरी और रामदेवरा सेंटर में वैज्ञानिकों और ग्राउंड स्टाफ की दिन-रात की मेहनत का नतीजा है कि इस साल हमने AI तकनीक से सफलता पाई है।
हमारा अगला बड़ा टारगेट इन पक्षियों की ‘सॉफ्ट रिलीज’ करना है। यानी सेंटर में जन्मे पक्षियों को धीरे-धीरे जंगल के माहौल में ढालकर आजाद करना। बिजली लाइनों पर बर्ड डायवर्टर लगाने से वाइल्ड में भी डेथ रेट कम हुआ है।
पॉपुलेशन बढ़ाने पर जोर
DFO (DNP) बृजमोहन गुप्ता ने बताया- जैसलमेर के सुदासरी और रामदेवरा में चल रहे ब्रीडिंग सेंटर आज पूरी दुनिया के लिए एक सक्सेस मॉडल बन चुके हैं। कभी खत्म होने की कगार पर खड़ी ‘सोन चिड़िया’ के लिए अब जैसलमेर का डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) एक सेफ आशियाना बन गया है। विशेषज्ञों की टीम अब आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (AI) और मॉडर्न साइंस का सहारा लेकर इस पक्षी की पाॅपुलेशन बढ़ाने में जुटी है। साल 2026 में गोडावण की संख्या 200 के करीब पहुंचना भारत के लिए एक बड़ा अचीवमेंट है।
AI और हाई-टेक ब्रीडिंग: जेरी और पर्व ने बनाया रिकॉर्ड
DFO (DNP) बृजमोहन गुप्ता ने बताया- इस साल कंजर्वेशन के मोर्चे पर सबसे बड़ी गुड न्यूज टेक्नोलॉजी से आई है। जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर में पहली बार आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन तकनीक का सफल इस्तेमाल किया गया। हाल ही में फीमेल गोडावण ‘जेरी’ और मेल ‘पर्व’ के मेल से AI तकनीक के जरिए चूजे का जन्म हुआ। गोडावण की नेचुरल ब्रीडिंग रेट बहुत स्लो होती है। अब एक्सपर्ट्स AI के जरिए मेल बर्ड के सीमन को सुरक्षित कलेक्ट कर साइंटिफिक तरीके से फीमेल को कंसीव करवाते हैं। इससे अंडे के फर्टिलाइज होने के चांस कई गुना बढ़ गए हैं।
ब्रीडिंग सेंटर की जर्नी: कब क्या हुआ?
2018-19 में केंद्र और राज्य सरकार ने WII के साथ मिलकर ‘प्रोजेक्ट गोडावण’ लॉन्च किया। जैसलमेर के सुदासरी में पहला सेंटर 2019 में शुरू हुआ।
2022 में काम के दबाव को देखते हुए रामदेवरा में दूसरा बड़ा ब्रीडिंग सेंटर तैयार किया गया।
तकनीक: यहां ‘हच टू आउट’ फार्मूला अपनाया गया, जिसमें जंगल से रिस्की अंडों को लाकर मशीनों में रखा जाता है।