झीलों की स्थिति बेहतर, छोटे बांध अब भी खाली:उदयसागर 79 प्रतिशत भरा; साबरमती ओवरफ्लो, आकोदड़ा में 8 फिसदी पानी

मानसून की बारिश से उदयपुर की प्रमुख झीलों में पानी की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन जिले के छोटे और मझले बांध अब भी खाली हैं। 20 अगस्त की जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार उदयसागर में 21 फीट 4 इंच पानी है और यह 79.47% भर चुका है। फतहसागर 72.38% और पिछोला 70% भरा है। वहीं कोटड़ा क्षेत्र का साबरमती बांध पूरा भर चुका है और 15 अगस्त से ओवरफ्लो चल रहा है।

मानसी वाकल में 54% और आकोदड़ा में महज 8% पानी है। सीसारमा नदी में 50.43 क्यूसेक और नांदेश्वर चैनल में 25 क्यूसेक आवक बनी हुई है। इससे पिछोला झील में लगातार आवक जारी है। जिससे झील का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

दूसरी ओर कई बांधों में पानी काफी कम है। गोवर्धन विलास में जलस्तर 6 फीट 2 इंच है और भराव 46.35 प्रतिशत है। अलसीगढ़ बांध में 17 फीट 6 इंच पानी है, जो 34 फीट के पूर्ण भराव स्तर का 33.74 प्रतिशत है। घासा बांध में 6 फीट 5 इंच पानी है और भराव 27.09 प्रतिशत है। बागोलिया बांध का पूर्ण भराव स्तर 21 फीट 6 इंच है, लेकिन वर्तमान जलस्तर शून्य दर्ज किया गया है और भराव 2.92 प्रतिशत है। खरताना बांध में भी जलस्तर शून्य है और भराव 3.11 प्रतिशत है। सालेरा बांध 2.66 प्रतिशत, फीला 6.53 और भट्ट बांध 7.47 प्रतिशत भरा है। ढूंढिया बांध में केवल 6 इंच पानी दर्ज हुआ।

चिंता: रबी की फसलों पर होगा असर

जिले के कई छोटे और मझले बांधों में कम भराव आगे परेशानी बढ़ा सकता है। बारिश नहीं हुई तो इन बांधों पर निर्भर क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की कमी हो सकती है। इससे रबी फसलों की बुआई और बाद में सिंचाई प्रभावित होने की आशंका रहेगी। बांधों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा तो भूजल पुनर्भरण भी कम होगा और कुओं-हैंडपंपों का जलस्तर गिर सकता है। फतेहसागर, पिछोला और उदयसागर में अच्छी स्थिति से शहर की पेयजल व्यवस्था को फिलहाल राहत है, लेकिन छोटे बांध खाली रहे तो ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का संकट गहरा सकता है।

आगे : सितंबर में बारिश के संकेत

मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार इस सप्ताह में उदयपुर संभाग में मौसम शुष्क बना रहेगा। इसके बाद सितंबर माह के पहले और दूसरे सप्ताह में राज्य के अधिकांश भागों में वर्षा होने की संभावना है। उदयपुर में जिले में भी चक्रवाती तूफान सहित अन्य कारणों से हुई तेज बरसात में शहर की झीलें एक रात में लबालब हो गई थीं। अभी मानसून का दौर बाकी होने से खाली पड़े बांधों और झीलों के भरने की उम्मीद है।