Prayagraj Magh Mela 2021: माघ मेला क्षेत्र में आधी-अधूरी तैयारियों के बीच मकर संक्रांति का स्नान कल

मकर संक्रांति का स्नान पर्व गुरुवार को है। यह प्रयागराज माघ मेला का प्रथम स्‍नान पर्व होगा। हालांकि माघ मेला की तैयारियां अभी भी पूरी नहीं हो सकी है। कहीं घाट नहीं बन सके हैं तो कहीं टेंट ही नहीं लगे। जो टेंट लगे भी उसमें सारी सुविधाएं नहीं मिली हैं। अभी कई संतों को जमीन का आवंटन भी बाकी है। कुछ संतों के बीच जमीन का विवाद भी चल रहा है। प्रयागवाल के तीर्थ पुरोहितों को जमीन का आवंटन भी नहीं हुआ है। ऐसे में माघ मेला के दौरान यहां बसने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्नान पर्व के दिन दुकाने सजना मुश्किल लग रहा है

कोरोना वायरस संक्रमण काल में आयोजित होने वाले माघ मेले की तैयारी इस बार देर से शुरू हुई। पूरी व्यवस्था करने में मेला प्रशासन को समय कम था। इसके लिए शासन से निर्देश मिला था कि अतिरिक्त श्रमिक लगाकर मेले की तैयारी समय से पूरा कर लें। फिर भी तैयारी अधूरी ही है। मेला क्षेत्र का परेड ग्राउंड अभी पूरी तरह से खाली है। यहां पर दुकानें भी नहीं लगाई हैं। दुकानों के लिए जमीन का आवंटन आज किया जाएगा। ऐसे में स्नान पर्व के दिन दुकाने सजना मुश्किल है। झूला और मीना बाजार भी अब तक नहीं लगा है।

मेला क्षेत्र में यह है तैयारियों का हाल

स्नान घाट के रूप में संगम नोज तो तैयार हो गया। हालांकि अन्य क्षेत्रों में जो घाट बनाए जा रहे थे, वह पूरी तरह अभी तैयार नहीं हैं। गंगा नदी पर पांच पांटून पुल आने-जाने के लिए बना दिए गए लेकिन सेक्टर 4-5 में सड़कें पूरी तरह दुरुस्त नहीं हुई हैं। स्नान पर्व को देखते हुए मेला प्रशासन ने रूट चार्ट तैयार कर लिया है। मेला क्षेत्र में भीड़ को आने से रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है। गेट के पास ही वाहनों की पार्किंग बनाकर वही रोका जाएगा। मेला क्षेत्र में केवल पैदल लोग ही जा सकेंगे।

बिना कल्पवासी सूना-सूना सा लग रहा मेला

माघ मेला में कल्पवासियों का आना 26-27 जनवरी से शुरू होगा। उनका कल्पवास 28 जनवरी से शुरू होगा। इसलिए मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर बहुत कम कल्पवासी ही यहां आए हैं। जो कल्पवासी आए भी, उनको सुविधाएं नहीं मिली हैं। वह सुविधाओं के लिए मेला कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।

उपलब्ध नहीं हो रहा सामान

कल्पवासियों की शिकायत है कि उनको यहां बसने के लिए सामान सही नहीं मिल रहा है। कल्पवासियों को सामान मुहैया कराने के लिए छह एजेंसियों को ठेका दिया गया है लेकिन उनके पास सामान पर्याप्त नहीं है। जो समान हैं, उसमें कुछ फटे-पुराने भी हैं। इससे कल्पवासियों में नाराजगी है।