World Cancer Day: पुरुषों में होने वाले सबसे आम कैंसर कौन से हैं, जानें इनके लक्षण और कारण

World Cancer Day: कैंसर एक दुर्बल बीमारी है, जो शरीर के किसी भी अंग या ऊतक में शुरू हो जाती है। ये असामान्य रूप से और अनियंत्रित रूप से अपनी सामान्य सीमाओं से परे अन्य अंगों में फैलती है। इसलिए कैंसर दुनिया भर में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। हर साल लगभग 9.6 मिलियन लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठते हैं।

महिलाओं में स्तन, कोलोरेक्टल, फेफड़े, सर्वाइकल और थाइरॉइड कैंसर सबसे आम हैं, वहीं पुरुषों में फेफड़े, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल, पेट और लिवर कैंसर सबसे ज़्यादा देखा जाता है। आज के दिन यानी 4 फरवरी को विश्व भर में हर साल कैंसर दिवस मनाया जाता है।

आइए जानें 4 ऐसे कैंसर के बारे में जो पुरुषों में सबसे आम हैं।

फेफड़ों का कैंसर

धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का प्राथमिक कारण होता है, लेकिन ये उन लोगों को भी हो सकता है जिन्होंने कभी स्मोक न किया हो। फेफड़ों का कैंसर सबसे ख़तरनाक तरह का कैंसर माना जाता है और ये हवा में मौजूद प्रदूषण, तंबाकू चबाने और ख़तरनाक कार्सिनोजेनिक यौगिक के संपर्क में आ जाने से भी हो सकता है। फेफड़ों के कैंसर के सामान्य लक्षणों में खांसी आना, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, आवाज़ का बैठना, थूक में बदलाव और खून का जमाव शामिल है।

प्रोस्टेट कैंसर

प्रोस्टेट कैंसर के मामले पिछले कुछ समय में काफी बढ़ गए हैं। ये कैंसर प्रोस्टेट ग्लैंड के टिशू में उत्पन्न होता है और अंततः मूत्र प्रणाली और इसके कार्यों में हस्तक्षेप कर सकता है। प्रोस्टेट कैंसर में आखिरी स्टेज से पहले कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, लेकिन सामान्य लक्षणों में हड्डियों में दर्द, मूत्र में रक्त और मूत्र गुज़रने पर तनाव महसूस होना शामिल है।

कोलोरेक्टल कैंसर

कोलोरेक्टल कैंसर कोलोन या मलाशय का कैंसर होता है, जो मुख्य रूप से अधिक आयु वर्ग के पुरुषों / महिलाओं को प्रभावित करता है। मोटापा, धूम्रपान और इंफ्लामेट्री बॉवेल डिज़ीज़ इस तरह के कैंसर के जोखिम को बढ़ा देते हैं। इसके अलावा पारिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास, शारीरिक निष्क्रियता, उम्र, फाइबर युक्त भोजन का कम सेवन, और अत्यधिक प्रोसेस्ड और रेड मीट के सेवन से इसके खतरे के बढ़ने की संभावना हो जाती है। पेट दर्द, मलद्वार से खून बहना, आंत्र में बदलाव और वजन कम होने जैसे लक्षण ध्यान देने योग्य हो सकते हैं।

लिवर कैंसर

लिवर कैंसर और लिवर में मेटास्टेस होने के फर्क को समझना ज़रूरी है। क्योंकि लिवर कैंसर का मतलब है कि कैंसर लिवर में ही उत्पन्न हुआ है, जबकि लिवर में मेटास्टेस होने का मतलब है कि लिवर में किसी और अंग से कैंसर फैला है। लिवर कैंसर के लक्षणों में पीलिया, भूख में कमी और पेट दर्द शामिल हैं। शराब के सेवन को सीमित करने, नियमित रूप से व्यायाम करने, स्वस्थ खाने, वजन प्रबंधन और हेपेटाइटिस बी और सी जैसे वायरस से संक्रमित होने से खुद बचाए रखने से लिवर कैंसर के ख़तरे को कम किया जा सकता है।

ये 4 तरह के कैंसर पुरुषों में आमतौर पर देखे जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद सभी लोगों के लिए निवारक उपायों को अपनाने के साथ, समय-समय पर चिकित्सिक जांच और पेशेवर एक्सपर्ट से परामर्श करना आवश्यक है।