नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इस भारतीय खिलाड़ी के कहने पर फॉलो किया गया मिक्स पिचों वाला ट्रेंड

Ind vs Eng: भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही चार मैचों की टेस्ट सीरीज के आखिरी दो टेस्ट मैच और फिर उसके बाद पांच मैचों की टी20 सीरीज मोटेरा के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेली जानी है। इस मैदान पर तीसरा टेस्ट मैच खेला जा चुका है, जबकि सीरीज का आखिरी टेस्ट 4 मार्च से शुरू होने वाला है। ये सभी मुकाबले अलग-अलग पिचों पर होने हैं, जिसकी मिट्टी भी बिल्कुल अलग है और ये भारतीय क्रिकेट में एक नया चलन है।

आपको ये बात जानकर हैरानी होगी कि ग्राउंड में कुल 11 पिच बनी हुई हैं, जिसमें से छह लालमिट्टी की पिचें हैं और पांच कालीमिट्टी की बनी हुई हैं। तीसरे टेस्ट के लिए उपयोग की जाने वाली पिच लालमिट्टी से बनी हुई थी, जिस पर पिंक बॉल से मुकाबला खेला गया। ऐसे में इसमें कोई आश्चर्य वाली बात नहीं थी कि पहले दिन से ही यहां स्पिनरों को मदद मिलेगी। ऐसा हुआ भी जब अक्षर पटेल और आर अश्विन ने इंग्लैंड को धराशायी कर दिया।

। पटेल जब 2017 में दलीप ट्रॉफी के लिए पहली बार लखनऊ के एकाना क्रिकेट स्टेडियम पहुंचे थे, तो वहां स्ट्रिप्स के मिश्रण ने उन्हें सुखद आश्चर्य दिया। आम तौर पर, ग्राउंड में एक ही तरह की मिट्टी होती हैं, लेकिन एकाना में, छह तरह की लालमिट्टी की पिचें और पांच तरह की कालीमिट्टी की पिचें थीं।
वहीं, दलीप ट्रॉफी के समापन के बाद पार्थिव पटेल जब वापस अहमदाबाद पहुंचे तो उस समय मोटेरा में स्टेडियम का पुनर्निर्माण चल रहा था और उन्होंने उस विचार को स्थानीय अधिकारियों के साथ साझा किया। उन्हीं के कहने पर स्टेडियम में अलग-अलग मिट्टियों से बनी पिच का निर्माण हुआ था। गुजरात क्रिकेट संघ ने तब बीसीसीआइ के पिच और ग्राउंड्स कमेटी के प्रमुख दलजीत सिंह से संपर्क किया और छह लाल मिट्टी और पांच कालीमिट्टी की पिचें बनाने का विचार रखा। इंदौर और बड़ौदा के मैदान ने भी इसी तरह के पैटर्न का पालन किया है, हालांकि पिचों की संख्या अलग है।
दलजीत ने न्यूज एजेंसी आइएएनएस से बात करते कहा, “पार्थिव एकाना पिच प्रारूप से प्रभावित थे और उन्होंने मुझे अहमदाबाद से बुलाया और मुझे मोटेरा में पिचों की तैयारी में सहायता करने के लिए कहा। यही वजह है कि मैंने एकाना और फिर मोटेरा में दो अलग-अलग मिट्टी की पिचों पर जोर दिया, क्योंकि यह राज्य की टीमों को दक्षिण में या अन्य जगहों पर यात्रा करने में मदद करता है, ताकि वे शर्तों को पूरा सकें।”
उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, अगर आप देखें, तो महेंद्र सिंह धौनी ने भी एक बार कहा था कि भारत में लालमिट्टी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अब बहुत सारे वेन्यू मिक्स की कोशिश कर रहे हैं। प्रारंभ में, जीसीए केवल एक मिट्टी की पिचों की सीमित संख्या के लिए योजना बना रहा था। बाद में पार्थिव पटेल के कहने पर इसमें बदलाव किया गया।”