हमला करने वालों में पाक सबसे आगे फ्रांस और उसके राष्ट्रपति पर हमला करने में सबसे आगे पड़ोसी देश पाकिस्तान है। एक दिन पहले पाकिस्तान की संसद ने फ्रांस से अपने राजनयिक रिश्ते समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया था। जबकि बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामी देशों को इस संदर्भ में पत्र लिखा है कि फ्रांस और दुनिया में बढ़ रहे इस्लामोफोबिया के खिलाफ एक साथ मिलकर कार्रवाई होनी चाहिए। पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश में प्रदर्शन पाकिस्तान के कई शहरों में बुधवार को भी फ्रांस के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। पंजाब प्रांत में आयोजित एक रैली में एक मौलाना ने फ्रांस पर परमाणु बम से हमला करने की मांग की। पाकिस्तान समेत कई इस्लामी देशों में फ्रांस की कंपनियों और उत्पादों का बहिष्कार करने की अपील की जा रही है। इससे एक दिन पहले मंगलवार को बांग्‍लादेश में हजारों की संख्‍या में लोगों ने प्रदर्शन किया था।

पैगंबर मोहम्‍मद साहब के कार्टून के विरोध में फ्रांस के खिलाफ मुस्लिम देशों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। दुनिया के कई मुल्‍कों में मुस्लिम समुदाय फ्रांसीसी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान कर रहा है। सबसे ज्‍यादा आपत्ति फ्रांसीसी राष्‍ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के इस्‍लाम पर दिए गए विवादित बयान को लेकर है। मैक्रों ने कहा था कि कि इस्‍लाम संकट में है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में मंगलवार को लगभग 10,000 लोगों ने पैगंबर के कार्टून के विरोध में जुलूस निकाला। लोगों ने फ्रांसीसी वस्तुओं के बहिष्कार की गुजारिश की…

उधर, पाकिस्तान ने पैंगंबर के कार्टून के प्रकाशन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बयान पर तीखा विरोध जताया। पाकिस्‍तान ने सोमवार को फ्रांसीसी राजदूत मार्क बरेती को तलब कर कड़ी नाराजगी जताई। यही नहीं पाकिस्‍तान की संसद ने सरकार से पेरिस से अपना दूत वापस बुलाने तक की मांग कर डाली। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के गैरकानूनी और इस्लाम विरोधी कृत्य पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया भर में मुस्लिम समाज की भावनाओं को आहत करते हैं। ऐसे कदमों को जायज नहीं ठहराया जा सकता है।

आलम यह है कि कुवैत में तमाम स्टोरों से फ्रांसीसी वस्तुओं को हटा लिया गया है। यहां तक कि कतर विश्‍वविद्यालय ने फ्रांसीसी सांस्कृतिक सप्ताह को ही रद कर दिया है। सऊदी अरब एवं संयुक्त अरब अमीरात में लोगों से कैरेफोर ग्रोसरी स्टोर चेन से दूर रहने की गुजारिश की गई है। इन बहिष्‍कारों का कोई बड़ा असर तो नहीं देखा जा रहा है, लेकिन इस तरह के विरोध ने दुनियाभर में एक माहौल तो बना ही दिया है। बीते दिनों तुर्की, बांग्लादेश और गाजा पट्टी में विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया गया।

उल्‍लेखनीय है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब पेरिस के पास 16 अक्टूबर को फ्रांस में किसी क्‍लास में पैगंबर का कार्टून दिखाने पर एक फ्रांसीसी शिक्षक की किसी कट्टरपंथी ने सिर काटकर हत्या कर दी थी। इस घटना को लेकर फ्रांस के लोगों में भारी आक्रोश था। नतीजतन फ्रांस के एक शहर की इमारत पर पैगंबर का कार्टून प्रदर्शित कर दिया गया। यही नहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कह दिया कि वह इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा को रोकने के लिए दोगुनी कोशिश करेंगे। इसके बाद शुरुआत तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने की और देशवासियों से फ्रांसीसी सामान नहीं खरीदने अपील की।

एर्दोगान ने कहा कि इमैनुअल मैक्रों के मानसिक जांच की जरूरत है। इसके बाद तो दुनियाभर में एक के बाद एक बयानबाजियों का दौर शुरू हो गया। मलेशिया ने कहा है कि वह मुस्लिमों के प्रति बढ़ती आक्रामकता से चिंतित है। ढाका में एक इस्‍लामि‍क समूह के बैनर तले लगभग 10 हजार लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लिए हुए थे और फ्रांस का बहिष्कार करो और दुनिया के सभी मुसलमानों एकजुट हो जाओ, जैसे नारों के साथ लोगों ने आवाज बुलंद की। यही नहीं, प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की तस्वीर भी लाए थे…