जानेमाने उद्योगपति और अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने गुरुवार को अयोध्या में रामलला के दर्शन किए। बिजनेसमैन गुरुवार सुबह 8.30 बजे पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अयोध्या पहुंचे। अहमदाबाद से 2 चार्टर्ड फ्लाइट्स से महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड हुए।
यहां से लंबे काफिले के साथ सीधे श्री राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे। रामलला के दर्शन-पूजन किए। मंदिर का भ्रमण किया। पुजारी से तिलक लगवाया। प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद उन्होंने अयोध्या के निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय में छात्रों से मुलाकात की। उन्हें सम्मानित किया।
गौतम अडाणी यहां से लखनऊ रवाना होंगे। सीएम योगी से मुलाकात करेंगे। इससे पहले गौतम अडानी 22 जनवरी 2024 को अयोध्या आए थे। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे।
16 साल की उम्र में शुरू कर दिया था कारोबार
- गौतम अडाणी का जन्म 24 जून 1962 को अहमदाबाद के गुजराती जैन परिवार में हुआ था। महज 16 साल की उम्र में बी-कॉम की पढ़ाई छोड़कर वो मुंबई चले गए। वजह थी परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति। मुंबई में उन्होंने डायमंड सॉर्ट महिंद्रा ब्रॉस में नौकरी कर ली। कुछ ही महीने बाद उन्होंने खुद का डायमंड ब्रोकरेज आउटफिट शुरू किया।
- 1981 में उनके भाई ने एक प्लास्टिक फैक्ट्री खोली थी, जिसका काम संभालने के लिए वो गुजरात लौट आए। अडाणी ने 1988 में अडाणी एंटरप्राइजेज की शुरुआत की, जो कमोडिटी इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का काम करती थी। 1995 में अडाणी की कंपनी को मुंद्रा पोर्ट का कॉन्ट्रैक्ट मिला। ये कॉन्ट्रैक्ट अडाणी की सफलता में मील का पत्थर साबित हुआ।
- ये अब एक ऐसे ग्रुप में बदल गया है जो कोल ट्रेडिंग, माइनिंग, लॉजिस्टिक्स, पावर जनरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन तक फैला हुआ है। अडाणी ग्रुप ग्रीन एनर्जी, एयरपोर्ट्स, डेटा सेंटर्स और सीमेंट इंडस्ट्री में भी है। गौतम अडाणी ने अपने ग्रुप को दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्रोड्यूसर बनाने के लिए 2030 तक कुल 70 अरब डॉलर का निवेश करने का कमिटमेंट किया है।
- गौतम अडाणी की पत्नी प्रीति अडाणी के नेतृत्व में अडाणी फाउंडेशन की स्थापना 1996 में हुई थी। इसने भारत के ग्रामीण इलाकों में सोशल प्रोगाम्स पर काम किया है। अडाणी ग्रुप की वेबसाइट के अनुसार वर्तमान में ये फाउंडेशन देश के 18 राज्यों में सालाना 34 लाख लोगों के उत्थान में मदद कर रहा है। प्रीति अडाणी पेशे से डॉक्टर हैं, जिन्होंने डेंटल सर्जरी (BDS) में ग्रेजुएशन किया है।
किडनैप कर मांगी गई थी 11 करोड़ की फिरौती
साल 1998 का पहला दिन था। गौतम अडाणी और शांतिलाल पटेल अहमदाबाद के कर्णवती क्लब से कार पर सवार हुए। ये कार मोहम्मदपुरा रोड की तरफ जा रही थी। रास्ते में बीच सड़क पर एक स्कूटर खड़ा मिला। कार जैसे ही रुकी, तभी वहां एक वैन पहुंची। वैन में सवार लोगों ने अडाणी और पटेल को किडनैप कर लिया और किसी अज्ञात जगह पर ले गए। पुलिस चार्जशीट के मुताबिक इन दोनों को छोड़ने से पहले 11 करोड़ रुपए फिरौती मांगी गई थी।
26/11 हमले में भी बाल-बाल बचे
ऐसा ही एक वाकया 26 नवंबर 2008 का है। गौतम अडाणी मुंबई के ताज होटल स्थित वेदर क्राफ्ट रेस्टोरेंट में दुबई पोर्ट के सीईओ मोहम्मद शर्राफ के साथ डिनर कर रहे थे। उन्होंने देखा कि कुछ आतंकी होटल में घुस आए हैं और ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे हैं। 26 नवंबर की पूरी रात उन्होंने होटल के बेसमेंट में दहशत के साये में बिताई। 27 नवंबर की सुबह उन्हें बचाया गया। अपने प्राइवेट विमान से अहमदाबाद पहुंचते ही उन्होंने कहा, ‘मैंने 15 फीट की दूरी से मौत देखी है।’