जिस गरीब के घर में चूल्हा जलना मुश्किल है, उसकी जेब से एक-एक रुपए निकालकर सरकार कौन-सा खजाना भरना चाहती है? गांव का आदमी हर दिन अपनी रोजी-रोटी की लड़ाई लड़ रहा है। अब उस पर टैक्स का नया बोझ डाला जा रहा है।
ऐसी बातें कहने वाले दरभंगा के शंकरपुर गांव के अमोल यादव अकेले नहीं है। सम्राट सरकार बिहार में पहली बार गांववालों पर टैक्स लगाने जा रही है। ग्राम पंचायतों को टैक्स लगाने का अधिकार मिला है। लोगों को घर, दुकान, पानी और सफाई के लिए पैसे देने होंगे।
ग्रामीणों को देना होगा 360 से 5000 रुपए तक टैक्स
15 जुलाई 2026 को सरकार ने पंचायतों के जरिए सरकारी खजाना भरने के लिए ग्रामीणों पर सीधा टैक्स लगाया है। इसे वसूलने के नए नियमावली-बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के तहत गठित बिहार ग्राम पंचायत (कर, दर एवं शुल्क) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी। नए नियमों से ग्रामीणों पर 360 से 5 हजार रुपए तक सालाना टैक्स वसूलने का प्रावधान किया गया।
बिहार के गांवों में करीब 8.8 करोड़ लोग रहते हैं। नीतीश सरकार ने गांव के लोगों से टैक्स वसूलने का प्रावधान जरूर किया था, लेकिन इसके लिए नियमावली नहीं बनाई गई।
अब सम्राट सरकार ग्राम पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने के लिए टैक्स और शुल्क वसूलने का अधिकार देने संबंधी नियम लागू करने जा रही है। इसके तहत पंचायतें स्थानीय स्तर पर टैक्स वसूलेंगी। पंचायती राज विभाग के मुताबिक कुल 24 से अधिक तरह के टैक्स वसूलने का प्रावधान किया गया है।
50 से 5 हजार रुपए तक होल्डिंग टैक्स लगेगा
ग्रामीण क्षेत्रों में घरों और दुकानों आदि पर 50 से 5000 रुपए तक होल्डिंग टैक्स लगेंगे। जल्द ही पंचायती राज विभाग इस संबंध में आदेश जारी करेगा और वसूली की प्रक्रिया शुरू होगी। मकान, दुकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर शुल्क वार्षिक जबकि जलापूर्ति शुल्क मासिक देना होगा।
गांव के लोगों पर लगाए जाएंगे ये बड़े टैक्स
- होल्डिंग (संपत्ति) टैक्स– नगर निकाय क्षेत्र की तरह अब पंचायत क्षेत्र में भी होल्डिंग टैक्स वसूली होगी। पंचायत सालाना ग्रामीणों से यह टैक्स वसूल करेंगी। आवासीय मकान, कमर्शियल बिल्डिंग और जमीन, दुकान, गोदाम और अन्य स्थायी भवन पर यह लागू होगा।
- हाट, बाजार और मेला शुल्क– गांव के हाट, बाजार और मेला में सामान बेचने वालों के टैक्स वसूला जाएगा। इसके लिए पंचायत सरकार टेंडर जारी करेगी।
- जलापूर्ति एवं स्वच्छता सेवा शुल्क– पंचायत की सरकार हर घर नल का जल के तहत पीने का पानी आपूर्ति करने और कूड़ा उठाव के लिए ग्रामीणों से पैसे लेगी।
- मंदिर-मस्जिद और मठ पर टैक्स– पंचायत मंदिर-मस्जिद और मठ से पैसे वसूलेंगी। गांव में यह पहली बार देखा जाएगा।
- बूचड़खाना– बूचड़खाना संचालक से टैक्स लिया जाएगा।
- लघु उद्योग, मिल, गैर कृषि उद्योग और विज्ञापन शुल्क– गांव में छोटा उद्योग चलाने वालों, चावल मिल, तेल मिल और आटा चक्की वालों से टैक्स लिया जाएगा। गांव में विज्ञापन लगाने पर भी टैक्स देना होगा। टैक्स साल भर में एक बार देना होगा।
- जीविका दीदी: स्वयं सहायता समूह से जुड़ी जीविका दीदी अगर कोई छोटा-मोटा कारोबार करती हैं तो उन्हें टैक्स देना होगा।
- ईट भट्ठा, पेट्रोल पम्प, गैस एजेंसी- गांव में ईट भट्ठा चलाने वालों और पेट्रोल पम्प व गैस एजेंसी के मालिक को टैक्स देना होगा।
- मैरिज हॉल- गांव में चलने वाले मैरिज हॉल पर टैक्स का बोझ डाला गया है।
- बस-आटो स्टैंड- बस, ऑटो और तिन पहिया गाड़ियों के ठहराव स्थल से पैसे वसूल किए जाएंगे।
सम्राट सरकार के टैक्स वसूली प्लान पर क्या कहते हैं गांव के लोग
दरभंगा जिला के सिंघवाड़ा के शंकरपुर गांव में रहने वाले अमोल यादव ने कहा, ‘अगर सरकार को राजस्व चाहिए तो शराबबंदी की सच्चाई पूरे बिहार के सामने है। हर गांव, हर चौक, हर गली में शराब बिक रही है। जब शराब खुलेआम बिक रही है, तो गरीबों की झोपड़ी पर टैक्स क्यों? अब समय आ गया है कि सरकार हकीकत को स्वीकार करे और शराबबंदी कानून पर पुनर्विचार करे।’
मुजफ्फरपुर के औराई प्रखंड के दीनबंधु ने कहा, ‘बिहार का गरीब पहले ही सबसे कम आय में जिंदगी गुजार रहा है। किसान कर्ज में हैं, मजदूर रोज काम की तलाश में भटक रहे हैं, महिलाएं परिवार बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। करोड़ों लोग सरकारी राशन के सहारे दो वक्त की रोटी जुटा रहे हैं। ऐसे लोगों से टैक्स वसूलना उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। सरकार को गरीबों का हाथ थामना चाहिए, न कि उनकी खाली जेब टटोलनी चाहिए।’
औराई प्रखंड के निवासी राज शेखर ने कहा, ‘गांव की सड़कें टूटी हुई हैं, नालियां अधूरी हैं, पीने का पानी नहीं, सफाई नहीं, स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था बदहाल है। पंचायतों में सुविधाएं लगभग शून्य हैं। जब सरकार बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दे पा रही तो गरीबों पर होल्डिंग टैक्स का बोझ क्यों? जिसने जिंदगी भर मेहनत करके एक छोटा-सा पक्का घर बनाया, आज उसपर टैक्स की तलवार लटका दी गई है। यह गरीब की मेहनत का सम्मान नहीं, बल्कि उसके संघर्ष पर चोट है।’
औराई प्रखंड के नवनीत कुमार ने कहा, ‘सरकार एक हाथ से गरीब को पांच किलो राशन, पेंशन और मुफ्त बिजली देती है तो दूसरे हाथ से उसी गरीब की जेब से टैक्स निकालने की तैयारी कर रही है। जो मजदूर दिनभर पसीना बहाकर सौ-दो सौ रुपए कमाता है अब वो टैक्स भरेगा।
भोजपुर जिला के जगदीशपुर प्रखंड के देवराढ़ बाजार में रहने वाले दिलीप सिंह ने कहा, ‘गांव के लोगों से होल्डिंग टैक्स वसूलने का सरकार का फैसला गलत है। हमलोग अभाव में जी रहे हैं। न ठीक से बिजली रहती है न सिंचाई के इंतजाम हैं। मेहनत-मजदूरी करके घर बनाया है। अब इस पर सरकार टैक्स लेगी। यह तो बिल्कुल गलत बात है।
वाहन मालिकों से कितने तरह के टैक्स ले रही बिहार सरकार?
स्टेट हाईवे और पुल-पुलिया पर टोल- बिहार सरकार ने रोड यूजर फीस (निर्धारण एवं संग्रह) नियमावली, 2026 लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत सरकार स्टेट हाइवे पर टोल वसूलने जा रही है। पुल पार करने के लिए टैक्स देना होगा। टोल का दर सवा रुपए से लेकर 8 रुपए 10 पैसे किलोमीटर तय किया गया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि निजी कार, जीप और वैन से शुल्क नहीं लिया जाएगा। केवल वाणिज्यिक वाहनों पर यह लागू होगा।
दोपहिया पर 1% एकमुश्त मोटर वाहन कर देना होगा
राज्य सरकार ने बिहार मोटरवाहन करारोपण अधिनियम में संशोधन करते हुए टैक्स की दरें बढ़ा दी हैं। अब दोपहिया वाहनों पर 1% एकमुश्त मोटरवाहन कर देना होगा। तिपहिया वाहनों पर अब 1,000 रुपये का टैक्स लगेगा। इसका असर कुछ इस प्रकार पड़ेगा..
- बाइक पर एकमुश्त 6% कर लिया जाता है। नए दर से एस 1 फीसदी बढ़ाया गया। यानी अब 7 फीसदी टैक्स लिया जाएगा।
- अगर किसी बाइक की कीमत (GST/VAT छोड़कर) 1 लाख रुपए है तो मोटर वाहन कर 6%, मतलब 6 हजार रुपए लगता था। अब इसे 7 फीसदी कर दिया गया। यानी 7 हजार रुपए देने होंगे।
- तिन पहिया (4 यात्रियों तक, चालक को छोड़कर) वाहन के लिए पहले 9 हजार रुपए एकमुश्त टैक्स वसूला जाता था। नए प्रावधान के तहत अब 10 हजार रुपए देने होंगे।
- तिन पहिया (7 यात्रियों तक, चालक को छोड़कर) वाहन के लिए 13,500 की जगह 14,500 रुपए देने होंगे।
डीलरशिप टैक्स चार गुणा बढ़ा
गाड़ियों के डीलरशिप टैक्स को चार गुणा बढ़ाया गया है। डीलर को व्यापारिक उपयोग के लिए वाहन पर कुछ वार्षिक शुल्क जैसे मोटरसाइकिल पर 600 प्रति गाड़ी और भारी वाहनों के चेसिस पर 1000 रुपए प्रति गाड़ी की राशि को अब चार गुणा कर दिया गया। अब प्रति बाइक 2400 रुपए और प्रति भारी वाहन 4000 रुपए टैक्स देना होगा।
परिवहन विभाग की मानें तो नए टैक्स दर से सालाना 600 करोड़ रुपए की कमाई हो सकती है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक यदि एक वर्ष में लगभग 10 लाख नए दो पहिया वाहन रजिस्ट्रेशन होते हैं और प्रति वाहन औसत कर 5,000-6,000 रुपए बनता है तो इनसे लगभग 500-600 करोड़ का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान बिहार में लगभग 11 लाख से 12 लाख नए दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन और बिक्री हुई है। बिहार में सालाना 1 लाख तिन पहिया वाहन रजिस्ट्रेशन होते हैं। औसत कर 10,000 माना जाए, तो इनसे लगभग 100 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है। इस आधार पर कुल मोटर वाहन कर संग्रह लगभग 800 करोड़ रुपए प्रति वर्ष के आसपास हो सकता है।
जमीन का सर्किल रेट बढ़ा सरकार ने जमीन के न्यूनतम मूल्य यानी MVR सर्किल रेट में वृद्धि की है। इसके साथ ही स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री से जुड़े शुल्कों में भी संशोधन किया है। इसका सीधा असर जमीन और फ्लैट की खरीद पर पड़ रहा है।
कई क्षेत्रों में ग्रामीण इलाकों का MVR लगभग 1.6 गुना और शहरी क्षेत्रों का करीब दोगुना तक बढ़ाया गया है। राज्य सरकार ने रजिस्ट्री व्यवस्था में प्रशासनिक सुधार किया है। पेपरलेस डिजिटल रजिस्ट्री की शुरुआत करते हुए 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों के लिए घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा दी गई है।
क्या पंचायतों को टैक्स लगाने का अधिकार पहले से था?
पटना यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर अविरल पांडेय ने बताया कि भारत के 73वें संविधान संशोधन से पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया। संविधान के अनुच्छेद 243G के अनुसार पंचायत स्थानीय विकास, पेयजल, स्वच्छता, सड़क, प्रकाश व्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा अन्य नागरिक सेवाओं का संचालन करेंगे।
अनुच्छेद 243G राज्य विधानमंडल को यह अधिकार देता है कि वह कानून द्वारा पंचायतों को स्थानीय विकास, पेयजल, स्वच्छता, सड़क, सार्वजनिक स्वास्थ्य आदि विषयों से संबंधित शक्ति और जिम्मेदारी दे। स्पष्ट है कि अगर पंचायतों को विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई है तो उन्हें इसके लिए जरूरी वित्तीय संसाधन जुटाने का अधिकार भी मिलना चाहिए।
बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 27 में ग्राम पंचायतों को कर, दर एवं शुल्क लगाने का अधिकार पहले से दिया गया था।
टैक्स लगाने से क्या फायदा होगा?
अविरल पांडेय ने कहा कि वर्तमान में ग्राम पंचायतें विकास कार्यों के लिए पूरी तरह राज्य एवं केंद्र सरकार के अनुदानों पर निर्भर हैं। इसके चलते सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट तथा अन्य स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़े काम समय पर नहीं हो पाते। जब तक पंचायतों के पास खुद के राजस्व का आधार नहीं होगा तब तक स्थानीय स्वशासन अधूरा रहेगा।
क्या अन्य राज्यों में भी पंचायतें कर लगाती हैं?
कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश सहित अनेक राज्यों के पंचायतों को विभिन्न प्रकार के स्थानीय टैक्स एवं शुल्क लगाने का अधिकार है।
कर्नाटक में ग्राम पंचायतें भवन एवं भूमि कर, जल दर तथा अन्य कर एवं शुल्क लगाती हैं। केरल में भी ग्राम पंचायतों द्वारा संपत्ति कर और अन्य स्थानीय शुल्क वसूलने की व्यवस्था लंबे समय से लागू है।