मुख्यमंत्री ने इस दौरान पूजा मंडपों में दीप प्रज्ज्वलित कर देवी के चरणों में पुष्प अर्पित किए। बताते चलें कि मुख्यमंत्री ने लगातार तीसरे दिन कोलकाता के कई पंडालों में जाकर इसका उद्घाटन किया। उससे पहले बुधवार और गुरुवार को लगातार दो दिनों तक मुख्यमंत्री ने उत्तर बंगाल व दक्षिण बंगाल के जिलों में राज्य सचिवालय नवान्न से ही डिजिटल माध्यम से पंडालों का उद्घाटन किया था। बंगाल में दुर्गा पूजा पंडालों में दर्शनार्थियों के प्रवेश पर हाईकोर्ट की रोक बंगाल में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने दुर्गा पूजा पंडालों में दर्शनार्थियों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि बंगाल में दुर्गा पूजा पंडाल नो एंट्री जोन घोषित होंगे। यानी पंडाल में दर्शन के लिए आम लोग नहीं जा सकेंगे। पंडालों में सिर्फ आयोजकों की ही एंट्री होगी। दरअसल, बिजली विभाग के एक पूर्व कर्मचारी अजय कुमार ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी जिसमेंं उन्होंने कहा था कि जब कोरोना के संक्रमण के कारण शिक्षण संस्थान बंद हैं तो फिर सरकार ने दुर्गा पूजा की अनुमति क्यों दी है। इसी याचिका पर सोमवार को सुनवाई करतेे हुए न्यायाधीश संजीब बंद्योपाध्याय ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में लाखों की संख्या में दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ती है और मौजूदा पुलिस बल के जरिए ऐसी स्थिति में शारीरिक दूरी का पालन कराना बेहद मुश्किल कार्य है। लिहाजा दुर्गा पूजा पंडालों में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगानी होगी। पंडालों से पहले लगाने होंगे बैरिकेड हाईकोर्ट ने कहा कि पंडालों से पहले बैरिकेड लगाने होंगे। इसके अलावा इनमें नो एंट्री के बोर्ड लगाने होंगे। सभी बड़े पंडालों को 10 मीटर की दूरी पर जबकि छोटे पंडालों को पांच मीटर की दूरी पर बैरिकेड लगाने होंगे। पूजा पंडालों में सिर्फ आयोजक ही मौजूद रह सकेंगे। इनमें बड़े पूजा पंडालों में 25 और छोटे में 15 लोगों को जाने की अनुमति होगी। इसके लिए भी सभी के नाम पंडालों के सामने सूची के रूप में चस्पाना होगा और लिखना होगा कि कौन लोग किस समय पंडाल में रहेंगे। कोर्ट ने कहा, इतनी पुलिस नहीं कि पंडालों में दर्शनार्थियों को नियंत्रित कर सके हाईकोर्ट ने कहा कि कोलकाता में इतनी पुलिस नहीं है कि 3000 पंडालों में दर्शनार्थियों को नियंत्रित कर सके। जिलों में स्थिति और भी खराब है। हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक व कोलकाता पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि पूजा पंडालों में अदालत के आदेश पर कितना अमल हुआ इसकी जानकारी हलफनामा के रूप में पांच नवंबर को सुनवाई के दौरान देनी होगी। इधर, महानगर के पूजा आयोजकों ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के मद्देनजर यह फैसला स्वागत योग्य है। कोरोना महामारी से बंगाल में हर दिन पचास से अधिक लोगों की जानेें जा रही हैं। वहीं, संक्रमित होने वालों का आंकड़ा नित नया रिकार्ड बना रहा है। हर दिन संक्रमित होने वालों की संख्या चार हजार के करीब पहुंच चुकी है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बार फिर से प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर निशाना साधा है। बीते दिन भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी के खिलाफ एक जनसभा में अमर्यादित बयान को लेकर हुई सियासत को फिर से हवा दी है। बीदे दिन एक कमलनाथ इमरती देवी के खिलाफा अपशब्द का इस्तेमाल किया था, हालांकि कमलनाथ ने अपने बयान के लिए स्पष्टीकरण दे दिया है, लेकिन मुख्यमंत्री राज्य में होने वाले उप-चुनाव में इस मौके को छोड़ना नहीं चाहते हैं। शिवराज सिंह ने ताजा हमला करते हुए सोमवार को एक चुनावी रैली में कहा कि कमलनाथ को क्या हो गया है। उन्होंने इमरती देवी के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया है वह उसको दोहरा भी नहीं सकतें हैं और भारतीय जनता पार्टी के सवाल उठाने पर उन्होंने खुद को बेशर्मी से सही साबित करने के लिए स्पष्टीकरण दिया। शिवराज ने कहा कि अगर आपकी मां और बहन के साथ कोई अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करे तो क्या आप सहन कर पाएंगे।

कमलनाथ ने शिवराज को लिखी था पत्र

बता दें कि इससे पहले कमलनाथ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि भाजपा प्रत्याशी इमरती देवी के खिलाफ उन्होंने कुछ भी अपमानजनक नहीं बोला है। साथ ही दावा किया था कि इस शब्द का इस्तेमाल कई अलग-अलग संदर्भों में किया जा सकता है।

शिवराज ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा- कमलनाथ को सभी पदों से हटाया जाए

शिवराज सिंह चौहान ने बीते दिन इमरती देवी के खिलाफ इस्तेमाल किए गए शब्द को लेकर भाजपा की तरफ से मौन उपवास रखा गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कमलनाथ को पार्टी के सभी पदों से हटाने की मांग की है। सीएम ने सोनिया गांधी को लिखे पत्र में कहा था, ‘आपकी पार्टी के नेता औरपूर्व मुख्यमंत्री ने यह (अभद्र) टिप्पणी की है। क्या यह ठीक है? क्या गरीब महिला का कोई सम्मान नहीं होता है? अगर आपको लगता है कि वह टिप्पणी गलत थी तो आप क्या कार्रवाई करेंगी?मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप फैसला लें।’